इस पहली मुलाकात के बाद गाजियाबाद में हुए मुशायरे में फिर फहमी बदायूंनी को बुलवाया गया, जहां मोरारी बापू ने भी उनके शेर को खूब सराहा। इसके बाद वह अपने शेरों की वजह से सोशल मीडिया पर छा गए। उन्होंने कहा कि फहमी बदायूंनी बहुत अच्छे शायर थे। उन्होंने बदायूं की विरासत को अपने शेरों के जरिये जिंदा रखा।
हमारा काफी बड़ा नुकसान हुआ है, कोई नहीं समझेगा
वसीम बरेलवी कहते हैं कि हमारा बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। फहमी बदायूंनी एक नेकदिल और खामोश मिजाज शायर थे। उनकी पकड़ उर्दू शायरी में किसी से छिपी नहीं है। वह आगे भी काफी मुकाम हासिल करते। अभी तो उनका नौ से 10 साल का ही सफर लोगों ने देखा था। उन्होंने रिवायतों को नए तरीकों से पेश किया, यह उनका बड़ा कारनामा था। फहमी बदायूंनी के जाने से शेरों का, गजल और हमारे मंच का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।