मट्टी डालकर भरे गए चौपुला पुल के गड्डे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
निगम का कूड़ा डालने से पहले गड्ढे में भरा गया था रेता, छोटे गड्ढे अभी भी वैसे ही
बरेली। अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए मुख्यमंत्री के दौरे से ऐन पहले सरकारी ओहदेदारों ने पुराने चौपला पुल के बड़े गड्ढे को निगम से कूड़े से पाट दिया। थोड़ी मिट्टी डाली और कुछ ईंट के टुकड़े भरकर पुल को गड्ढामुक्त बनाने की रस्म निभा दी। कूड़े से पाटा गया यह गड्ढा मामूली बूंदाबांदी से ज्यादा दबाव नहीं झेल पाएगा। पुल में बने दूसरे छोटे गड्ढे अभी भी जस के तस हैं। इनकी वजह से पुल पर हादसों का खतरा बरकरार है। खासकर बारिश में यह गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री के मिनट टु मिनट कार्यक्रम में हालांकि सिर्फ मंडलीय समीक्षा का कार्यक्रम था। उन्हें त्रिशूल एयरबेस से सीधे कमिश्नरी और फिर वापस त्रिशूल एयरबेस जाना था। लेकिन सीएम के कहीं भी औचक निरीक्षण की संभावना में स्थानीय प्रशासन ने शहर के सभी संभावित इलाकों में पूरी तैयारी की थी। आनन फानन पूरे शहर में मुख्य सड़कों के किनारे घास की कटाई से लेकर चूने के छिड़काव तक की रस्म अदा की गई थी। गहरे - गहरे गड्ढों के लिए पहचाने जाने वाले शहर के पुलों और सड़कों को भी आनन फानन कूड़े और मिट्टी से पाटा गया था।
चौपुला ओवरब्रिज पर करीब आधा फीट गहरे तक खतरनाक गड्ढे हो गए हैं। मुख्यमंत्री का प्रोग्राम मिला तो सेतु निगम ने रातोंरात इन गड्ढों को भरने का नया तरीका निकाला। कहीं रेत भरी तो कहीं निगम का कूड़ा लाकर भर दिया। पुराने चौपुला पुल का बड गढ्डा भी निगम के कूड्े मिट्टी और ईंट के टुकड़ों से भर दिया गया है। हालांकि इस पुल में अभी भी दो फीट चौड़ा और छह इंच गहरा एक गड्ढा बरकरार है। सेतु निगम की लापरवाही का यही हाल रहा तो छोटे - छोटे गड्ढे बड़ा आकार ले लेंगे और बारिश में बड़े हादसों का सबब बन सकते हैं।