केला बाग में जमीन के टुकड़े पर हिंदू - मुस्लिमों में था विवाद
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दोनों पक्षों ने समझौता कर शिक्षा विभाग को स्कूल के लिए दी थी भूमि
बरेली। केला बाग में जमीन के जिस टुकड़े को हिंदू - मुस्लिमों ने आपसी विवाद निपटाकर स्कूल के लिए दान में दिया था उसे निगम ने कूड़ाघर बना डाला है। जमीन के इस टुकड़े पर दोनों समुदाय के लोगों में काफी समय से विवाद था। दोनों पक्ष इस पर अपना - अपना दावा जता रहे थे। बाद में दोनों पक्षों ने समझौता समिति बनाकर फैसला किया। तय हुआ कि विवादित जमीन दोनों में से किसी एक पक्ष को देने के बजाए उस पर स्कूल बना दिया जाए। शिक्षा विभाग को स्कूल बनाने के लिए भूमि दान में दी गई थी लेकिन शिक्षा विभाग ने अभी तक स्कूल निर्माण की सुधि नहीं ली है। उल्टा निगम ने खाली पड़ी इस भूमि पर का इस्तेमाल कूड़ा डलावकर के रूप में करना शुरू कर दिया है।
केला बाग मोहल्ले में करीब पांच हजार वर्ग गज भूमि पर कब्जे को लेकर हिंदू - मुस्लिम पक्ष आमने सामने थे। इस दौरान सद्भावना समिति ने दोनों पक्षों से बात की और दोनों पक्षों को इस बात पर राजी किया कि यहां स्कूल का निर्माण करा दिया जाए। जिससे मोहल्ले के बच्चे भी पढ़ सकेंगे और विवाद भी खत्म हो जाएगा। करीब दो साल पहले समिति की ओर से जिला प्रशासन को इसका प्रस्ताव दे दिया गया। बीते दो वर्षों में शिक्षा विभाग के अधिकारी कई बार इस भूखंड पर पहुंचे। भूखंड की नपाई भी की गई लेकिन आज तक स्कूल निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। खाली पड़े प्लाट में मोहल्ले के लोग कूड़ा डालने लगे हैं। निगम के सफाई कर्मी भी इसे डलावघर के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं। स्कूल के लिए दान में दी गई जमीन को कूड़ाघर की शक्ल अख्तियार करते देख लोगों में गुस्सा है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि जमीन पर दो पक्षों में विवाद था। लेकिन कूड़ा कभी यहां नहीं पड़ता था। पहले यह भूमि खाली पड़ी थी। लेकिन जबसे स्कूल के लिए दान में दी तब से यहां कूड़ा पड़ना शुरू हो गया। सद्भभावना समिति के अध्यक्ष तोलेराम यादव ने बताया कि इलाके में कोई स्कूल नहीं है। यहां के बच्चों को स्कूल की बड़ी जरूरत है। यदि निर्माण जल्द हो जाएगा तो ठीक रहेगा। जिला प्रशासन को इस ओर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। वहीं सद्भावना समिति के उपाध्यक्ष अरविंद आनंद ने कहा कि शिक्षा विभाग को पूरा प्लाट फ्री में दे रहे हैं। उसके बाद भी विभाग स्कूल बनाने के लिए तैयार नहीं है। नगर शिक्षा अधिकारी देवेश राय ने बताया कि जमीन के मामले में शासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। जमीन दान में लेने की अनुमति अभी नहीं मिली है। अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।