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वर्कशाप में एक्सपर्ट ने जाना कैसा स्मार्ट शहर चाहते हैं बरेली वाले

Sat, 31 Oct 2015 02:11 AM IST
बरेली
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बरेली। केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत नगर निगम और कंसल्टेंट एजेंसी की ओर से आयोजित बहुचर्ति वर्कशाप में एक्सपर्ट्स ने अपने कांट्रेक्ट के तहत जन सहभागिता की रस्म पूरी की। नगर निगम अफसरों और कंसल्टेंट एक्सपर्ट ने शहर के प्रबुद्ध वर्ग से सपनों की बरेली के बारे में पूछा। कोई एक साफ सा सपना तो नहीं उभरा, हां बरेली को मेडिकल हब की तर्ज पर स्मार्ट बनाने के प्रस्ताव में कुछ दम नजर आया। बाकी सपने अस्पष्ट और उलझे से थे।  वर्कशाप में हिस्सा लेने आए लोगों ने नागरिक भागीदारी, अर्थव्यवस्था और रोजगार, स्वास्थ्य, परिवहन और चलने योग्य फुटपाथ, सार्वजनिक खुले स्थान, इंटेलीजेंट सरकारी सेवाएं, उच्च गति इंटरनेट कनेक्शन, उर्जा सप्लाई और उर्जा के स्रोत, जल प्रबंधन, अपशिष्ट जल प्रबंधन, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विषयों पर अपनी राय रखी।  
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मेयर डॉ. आईएस तोमर ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन में सरकार सौ फीसदी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दे तो भी नागरिक भागीदारी के बगैर शहर को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। सड़क, सीवर, पेयजल प्रबंधन, पार्क की सुविधा देने का काम नगर निगम का है लेकिन उसकी देखरेख करना नागरिकों की जिम्मेदारी है। नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने बताया कि स्मार्ट सिटी में  नागरिक भागेदारी के तहत ‘मेरे सपनों का शहर’ विषय पर छात्र-छात्राओं से निबंध के ऑनलाइन आवेदन मांगे गए है। 17 एंट्री मिल चुकी है। कंसल्टेंट हेड जॉन बोर्नेट ने कहा कि वर्कशाप स्मार्ट सिटी की शुरूआत भर है। किसी भी शहर को स्मार्ट बनाने में उसके नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। महिला पार्षदों की कम उपस्थिति पर उन्होंने कहा कि किसी भी काम में महिलाओं की भागीदारी उतनी ही जरूरी है जितनी कि पुरुष की। कहा कि वह सिर्फ मदद करने आए हैं। शहरवासियों को बाकी काम खुद करने हैं।

वर्ड क्लास स्मार्ट सिटी की झलक दिखाई
कंसल्टेंट एजेंसी ने वर्कशाप में उपस्थित शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को कम्यूटर स्क्रीन पर वर्ड क्लास स्मार्ट सिटी की झलक दिखाई। इसमें बताया गया कि आस्ट्रेलिया का मेलबर्न, कनाडा का रिचमंड व पेसेडीना और  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के मिनियापॉलिस सिटी अलग-अलग वजहों से दुनिया के सबसे स्मार्ट शहर माने जाते हैं। कोई शहर अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है तो दूसरा उच्चस्तरीय स्वच्छ पर्यावरण, डेवलपमेंट में सबको बराबरी का मौका देने, सुरक्षा, स्वास्थ्य की विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की वजह स्मार्ट माना जाता है। कंसल्टेंट एक्सपर्ट ने बताया कि स्मार्ट सिटी का कोई मानक तय नहीं है। कैसे स्मार्ट बनना है ये उस शहर के नागरिक तय करेंगे।
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चर्चा के बाद आए अलग-अलग विजन
वर्कशाप में मेडिकल, इंजीनियरिंग, उद्यमी, व्यापार मंडल, पार्षदों के लिए 12 अलग-अलग टेबल लगाई गई थीं। एक टेबल पर छह से आठ लोगों ने स्मार्ट सिटी के विजन पर चर्चा की। फिर उसे पोस्टर पर लिखकर चिपकाया गया। भोजीपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन अध्यक्ष अजय शुक्ला, सपा नेता अरविंद यादव, आईएमए अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल, पार्षद कपिल कांत, पार्षद के पति दीपक सक्सेना समेत वकील और मीडिया कर्मियों ने अपने-अपने विजन रखे।

बरेली को मेडिकल हब बनने का सुझाव
एसआरएमएस ट्रस्ट के सचिव आदित्य मूर्ति ने सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी मिशन में बरेली के मेडिकल हब बनने की पूरी संभावनाएं हैं। यहां तीन मेडिकल कालेज हैं। इसके अलावा नर्सिंग होम भी अच्छी संख्या में हैं। अगर बरेली को मेडिकल हब के रूप में डेवलप किया जाए तो इस शहर को स्मार्ट शहरों की श्रेणी में खड़ा किया जा सकता है।
औद्योगिक शहर का सपना
भोजीपुरा इंडस्ट्रियल एरिया चेयरमैन अजय शुक्ला का कहना था कि लखनऊ और दिल्ली के बीच में स्थित बरेली उत्तराखंड का प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां पहले भी फैक्ट्रियां चलती थीं। बीच में ये बंद हो गईं। स्मार्ट शहर के रूप में बरेली को औद्योगिक शहर के रूप में विकसित किया जा सकता है।

 वर्कशाप में ये मौजूद रहे
मेयर, नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, एक्सईएन सतीश कुमार, गयूर अहमद, जीएम जलकल, फ्यूचर ग्रुप से मुकेश गुप्ता, भोजीपुरा इंडस्ट्रियल एरिया अध्यक्ष अजय शुक्ला, जगपाल सिंह भाटी समेत मेडिकल, इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़े तमाम लोग मौजूद रहे।

इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
1-बुनियादी नागरिक सुविधाएं हाई लेबिल की हों
2- हर सुविधा की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिए
3- शहर की स्वच्छता और पर्यावरण
4- कचरा उठाने से लेकर निस्तारण के अत्याधुनिक इंतजाम
5- पेयजल सप्लाई का प्रबंधन उच्च कोटि का हो
6- शहर को स्मार्ट बनाने का आधार क्या है
7- नागरिक अपने शहर को स्मार्ट बनाने के लिए क्या चाहते हैं

कोट
 देश भर के 4041 शहरों में से सिर्फ सौ को स्मार्ट बनाने के लिए चुना गया है। सरकार ने स्मार्ट सिटी की कोई परिभाषा तय नहीं की है। स्मार्ट शहर की परिभाषा वहां के नागरिकों को तय करनी है।
-अनुराग एंथोनी, चीफ टेक्निकल आफीसर, अर्बन मैनेजमेंट सेंटर

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दूसरी खबर
 सर्वे का पहला चरण पूरा
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। टेक्निकल ऑफीसर अनुराग एंथोनी ने बताया कि स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट का सर्वे तीन चरणों में होना है। पहला चरण शहर का मूल्यांकन और नागरिकों की भागेदारी है। टीम के सदस्य शहर के सर्वे में दुकानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी दफ्तरों और अन्य लोगों से शहर के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं। दूसरे चरण में मास्टर प्लान, बुनियादी सुविधाओं की जनसंख्या के अनुपात में गैपिंग और आई सिटी (इनफारमेशन कम्यूनिकेशन टेक्नॉलोजी) का आकलन किया जाएगा। इसके बाद वह शहरवासियों के समक्ष ड्राफ्ट सिटी का खाका पेश करेंगे। तीसरे चरण में 10 दिसंबर तक स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के आधार पर ही केंद्र सरकार पहले चरण में 20 शहरों का चयन करेगी।

नागरिक भागेदारी को रखे गए तीन विकल्प  
 1- एरिया बेस डेवलपमेंट (किसी खराब एरिया को नए सिरे से डेवलप करना)
2- खुले स्थान पर नया डेवलपमेंट (ग्रीन फील्ड) करना।
 3- रेट्रोफिटिंग (पहले से मौजूद एरिया को बेहतर करना)

20 साल बाद की बरेली का विजन
वर्कशाप में स्मार्ट सिटी के तीनों विकल्पों में प्राथमिकता वाले विकल्प पर नागरिकों की प्राथमिकता पर राय जानी गई। सड़क, बिजली, पानी,सीवर, रोजगार, शिक्षा, ई गवर्नेंस आदि की उपलब्धता पर वर्कशाप में आए लोगों ने अपनी राय पोस्टर पर लिखकर व्यक्त की। कंसल्टेंट एजेंसी अब नागरिक सुविधाओं की प्राथमिकता का तकनीकी और आर्थिक क्षमताओं का मूल्यांकन करेगी। अगर बजट कम है तो प्राथमिकताएं चुननी होंगी। बरेली के नागरिक आगामी 20 साल में अपने शहर को कहां देखना चाहते हैं। इस पर अपना विजन पेश किया। कंसल्टेंट की तकनीकी टीम ने बताया कि प्रोजेक्ट के सर्वे में सरकारी सुविधाओं की अव्यवस्था पायी गई। सरकारी रिकार्ड में अगर चार घंटे पेयजल की सप्लाई होती है लेकिन हकीकत में वह एक या दो घंटे ही है।

वर्कशाप में सिर्फ 11 पार्षद ही पहुंचे
स्मार्ट सिटी की सबसे बड़ी वर्कशाप में उन लोगों ने ही शिकरत नहीं की जिनके लिए ये सबसे अहम है। नगरनिगम के 80 पार्षदों में से सिर्फ 11 ही पहुंचे। वर्कशाप में शिरकत करने वालों में विपुल लाला, कपिल कांत, विक्रम सिंह, रंजीत रस्तोगी, छंगामल मौर्य, सुखदीश कश्यप, आरबी प्रजापति, हरवंश कश्यप, जमुना प्रसाद मौर्य थे।
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