कड़ी पाबंदियां लगीं तो अस्पतालों पर भड़के लोग, संक्रमण फैलाने के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग
बरेली। यूं तो अब शहर में ही कई हॉटस्पॉट बन चुके हैं, लेकिन एक रेडियोलॉजिस्ट के संक्रमित मिलने के बाद बुधवार को ही हॉटस्पॉट घोषित हुए रामपुर बाग में पुलिस-प्रशासन की ओर से इस कदर पाबंदियां लगाई गई हैं कि आम लोग भी अब बौखला उठे हैं। बृहस्पतिवार को इस इलाके में पुलिस ने एक भी सब्जी-फल या दूध बेचने वाले को नहीं घुसने दिया। पुलिस की सख्ती से लोग इस कदर बौखला उठे कि उन्होंने अस्पतालों से आम लोगों को खतरा जताते हुए प्रशासन से मांग शुरू कर दी कि उसकी ओर से अस्पतालों को दी गई रियायत फौरन बंद की जाए।
माना जा रहा है कि रामपुर बाग में पुलिस-प्रशासन की ओर से इसलिए दूसरे हॉटस्पॉट की तुलना में ज्यादा सख्ती बरती जा रही है क्योंकि यहां संक्रमण एक डॉक्टर की वजह से फैलने की आशंका है। दूसरे रामपुर बाग में शहर की कई नामचीन और प्रमुख हस्तियों की रिहायश होने के साथ यहां तमाम सरकारी दफ्तर और बैंक भी हैं। हॉटस्पॉट बनने के बाद बृहस्पतिवार को यहां सख्ती का यह आलम था कि रामपुर बाग को ओर जाने वाले हर रास्ते पर बैरीकेडिंग कर दी गई थी। प्रशासन की ओर से जारी पास के बगैर किसी को भी क्षेत्र में आने नहीं दिया जा रहा था। पहली बार ऐसा हुआ कि जब किसी हॉटस्पॉट में मीडिया को भी नहीं घुसने दिया गया।
इस सख्ती के बीच जैसे-जैसे दिन गुजरता गया, रामपुर बाग के लोगों की तिलमिलाहट बढ़ती गई। कई लोगों ने खुद अमर उजाला को फोन करके प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ अस्पतालों के प्रबंधन पर नाराजगी जताई। ज्यादातर लोगों का कहना था कि रिहायशी इलाके में अस्पतालों की वजह से तमाम लोग भारी खतरा महसूस कर रहे हैं। रामपुर बाग में दूसरा मौका है जब किसी अस्पताल से संक्रमण फैलने का खतरा सामने आया है। हद यह है कि इसके बावजूद अस्पतालों के साथ उनमें आने-जाने वाले लोगों को भी प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। दूसरी ओर आम लोगों पर इतनी ज्यादा सख्ती दिखाई जा रही है। कई लोगों ने कहा कि प्रशासन ने संक्रमित रेडियोलॉजिस्ट के अल्ट्रासाउंड सेंटर से 250 मीटर के दायरे को ही सील करने का निर्देश दिया है मगर पुलिस ने पूरे रामपुर बाग को सील कर दिया है।
कूड़ा उठाने भी नहीं आए सफाईकर्मी
रामपुर बाग के लोगों का कहना था कि बृहस्पतिवार को रामपुर बाग में दूध, फल, सब्जी बेचने वालों को प्रवेश नहीं दिया गया। कोई भी सफाईकर्मी कूड़ा उठाने नहीं आया। इसकी वजह से सड़कों पर जगह-जगह कचरा पड़ा हुआ था। सख्ती और दहशत का आलम यह था कि सुबह बमुश्किल दो चार ही जनरल स्टोर खुले, मगर पुलिस ने उन्हें भी बंद करा दिया। घरों में दूध और ब्रेड समेत अन्य जरूरी सामान भी नहीं पहुंच सका।
क्यों खुली छोड़ी अल्ट्रासाउंड सेंटर के बगल की रोड
लोगों का कहना है कि नियमों के अनुसार अल्ट्रासाउंड सेंटर जहां संक्रमित महिला आई थी, उसके 250 मीटर दायरे का पूरा एरिया सील होना चाहिए था। मगर ठीक उसकी बगल में प्रभा टाकीज के सामने वाली रोड खुली रखी गई है और इनकम टैक्स ऑफिस, जो अल्ट्रासाउंड सेंटर से पांच सौ मीटर दूर है वह रास्ता बंद कर दिया गया है। जहां संक्रमण का खतरा है वहां का रास्ता बंद न करना समझ से बाहर है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस के इस निर्णय पर भी सवाल उठाए हैं।
कर्फ्यू ..!
खतरा फैलाने वालों को आजादी जो खतरे में हैं उन पर सख्ती
हॉटस्पॉट की आड़ में प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है। बेहद जरूरी काम होने पर भी लोगों को घर से नहीं निकलने दिया जा रहा। दूसरी ओर संक्रमण की वजह बन रहे दूरदराज से आने वाले लोगों को अस्पतालों तक जाने के लिए कोई रोकटोक नहीं हो रही है। हॉटस्पॉट एरिया है तो अस्पतालों पर भी सख्ती होनी चाहिए। - अतुल गोयल
शहर में और भी हॉटस्पॉट बने मगर वहां के रहने वालों को जरूरत का सामान लेने में कोई दिक्कत नहीं हुई। रामपुर बाग में जैसे कर्फ्यू ही लगा दिया गया है। बैरिकेडिंग के दस फुट के फासले पर अगर किसी का घर है तो उसे भी प्रवेश की अनुमति नहीं है, जिनकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई है उन अस्पतालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। - सतीश अग्रवाल
दूध, फल, सब्जी वालों को भी प्रवेश न मिलने से बेहद दिक्कत हो रही है। घर की बिजली खराब हो गई थी, इलेक्ट्रिशियन को फोन किया तो उसने सख्ती की वजह से आने से इनकार कर दिया। अस्पतालों में आने-जाने पर अब भी प्रतिबंध नहीं है। सख्ती अस्पताल पर होनी चाहिए ताकि आगे यह क्षेत्र हॉटस्पॉट ही न बन सके। - डॉ. नुपुर गोयल
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का यह बड़ा ही हैरत करने वाला निर्णय है कि जिसकी वजह से रामपुर बाग में संक्रमण आया उन अस्पतालों को छूट मिली हुई है। आम नागरिक जो अपने घरों में हैं, सामाजिक दूरी के नियमों का पालन कर रहे हैं, उन्हें जरूरत के सामान तक के लिए परेशान हो पड़ रहा है। - अमित अग्रवाल