जब प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराकर हिम्मत हार गए तो ऐसे मरीजाें को जिला अस्पताल लाया गया। इस दौरान अधिकतर की प्लेटलेट्स छह से 11 हजार और हीमोग्लोबिन की मात्रा मात्र चार ग्राम ही थी। इस स्थिति में मरीज को बचाना मुश्किल होता है, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसे मरीजों को एक नई जिंदगी दी है।
चकदेमा (शाही) के रहने वाले नारायण दास के 14 वर्षीय पुत्र जगनलाल को पिछले एक सप्ताह से बुखार था। प्राइवेट में इलाज कराकर हार गए तो जिला अस्पताल ले आए। यहां पहुंचे तो जगनलाल का हीमोग्लोबिन मात्र 4.6 ग्राम और प्लेटलेट्स 11 हजार थी। उसे चार यूनिट प्लेटलेट्स और दो यूनिट खून चढ़ाया गया। खून जगनलाल की मां ने दिया। फिलहाल, अब जगनलाल ठीक है। इसी तरह सुभाष नगर स्थित गंगानगर में बनवारी के 29 वर्षीय पुत्र ओमपाल की हालत काफी थी। वह भी बुखार से पीड़ित था। रविवार तक उसे चार दिनाें में चार यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाई गई हैं। अब वह ठीक है। सुभाष नगर की एक अन्य मरीज पेइंग वार्ड में भर्ती हैं, इनकी भी प्लेटलेट्स 10 हजार थीं। अब खून का नमूना दोबारा जांच के लिए भेजा गया है।
बुखार के कई मरीज आ रहे हैं, लेकिन ये तीन मरीज काफी गंभीर थे। इनको ब्लीडिंग तक होने की संभावना बनने लगी। ऐसे मरीजों का इतनी जल्दी रिस्पांस देना काफी अच्छी बात है। हालांकि अभी भी इलाज किया जा रहा है।
- डॉ. वागीश वैश्य, इलाज कर रहे डॉक्टर