Depth investigation of the case and the need to Sanjana
- फोटो : Depth investigation of the case and the need to Sanjana
एसडीएम मीरगंज अर्चना द्विवेदी ने सैंजना गांव की चार मौतों के मामले की जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। रिपोर्ट अभी उजागर तो नहीं हुई है लेकिन जानकारी मिली है कि मजिस्ट्रेट ने भी इसे हादसा नहीं माना है। तीन बहनों की नदी में अलग-अलग स्थानों पर लाश मिलने पर सवाल उठाए हैं। लड़के की मौत को लेकर भी जांच में तमाम सवाल खड़े किए गए हैं। पुलिस जल्दबाजी में इस केस को पहले ही दिन से खत्म करने की कोशिश में लग गई थी। पहले तीन बहनों की मौत को आत्महत्या बताया और फिर नामजद युवक की अगले ही दिन मौत हुई उसे भी आत्महत्या कहती रही। मजिस्ट्रेटी रिपोर्ट भी अमर उजाला की लाइन पर ही चल रही है। मजिस्ट्रेट ने साफ कहा है कि इस मामले की और गहनता से जांच की जरूरत है।
सैंजना गांव की शारदा, प्रीति, पिंकी और राजू की मौत के सच को पहले ही दिन से पुलिस दबाने में लगी रही। अमर उजाला ने पहले ही दिन से हत्या की आशंका जताते हुए कुछ पहलुओं को उजगार किया तो डीएम पंकज यादव ने मामले में दो सितंबर को मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश कर दिए। तत्कालीन एसडीएम पारसनाथ मौर्य ने जांच में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनका तबादला होने के बाद एसडीएम अर्चना द्विवेदी ने मजिस्ट्रेटी जांच की। एसडीएम ने जांच के दौरान तीनों बहनों और राजू के परिवार वालों समेत ग्यारह लोगों के बयान दर्ज किए। इसके बाद रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंप दी। रिपोर्ट में एसडीएम ने यह बात साफ कर दी है कि सैंजना में तीन बहनों की मौतें हादसा नहीं है। अब इस कांड में हत्या से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीण खौफ की वजह से हत्या का कारण नहीं बता रहे हैं। मजिस्ट्रेटी जांच में छत्रपाल और राजू के दोस्त सोमपाल पर संदेह जाहिर किया है। यह भी कहा गया है कि इन दोनों लोगों के अलावा ग्रामीणों से फिर से पूछताछ करके चारों मौतों का सच सामने आ सकता है।
कुर्सी बचाने को पुलिस करती रही खेल
बरेली। 26 अगस्त को सैंजना गांव के महेंद्र पाल की बेटी प्रीति, उनके चचेरे भाई ओमकार की बेटी शारदा और बेनीराम की बेटी पिंकी शौच के लिए जाने के बाद लापता हो गई थीं। अगले दिन उनमें से शारदा का शव सबसे पहले पहाड़पुर गांव के पास भाखड़ा नदी में मिला था। उसकी नाक और कान से खून बह रहा था। इसके बाद देर शाम को भाखड़ा नदी में ही प्रीति का शव धनेटा गांव के पास रेलवे पुल के नीचे मिला। उसकी खाल बुरी तरह से उधड़ी हुई थी और चेहरे की हालत खराब हो गई। इसके कुछ देर बाद पिंकी का शव गूला गांव के पास भाखड़ा नदी में मिल गया। शारदा के शव के करीब तीन किलोमीटर के दायर में प्रीति और पिंकी के शव मिलने से सवाल खड़े होने लगे। तीन बहनों की मौत की खबर लखनऊ पहुंचने के बाद वहां से पूछताछ होने लगी तो अफसर भी मौके पर पहुंच गए। परिवार वालों ने गांव के ही कच्ची शराब माफिया छत्रपाल, कुंवरपाल, राजेंद्र, सोनू और पड़ोसी राजू पंडित पर हत्या का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा ही दर्ज नहीं किया। हालांकि पुलिस ने मुकदमा ही दर्ज नहीं किया और पहले ही दिन से अधिकारी और थाने की पुलिस आत्महत्या करने का दावा करने लगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के दावे को और बल दे दिया, लेकिन आत्महत्या को कोई सच्चाई मानने को तैयार नहीं हुआ। क्राइम सीन हत्या की ओर ही इशारा करता रहा। इसी बीच हत्या का राज छुपाने के लिए राजू की हत्या कर दी गई। उसका शव गांव के पास ही जंगल में मिला। पुलिस ने उसकी मौत के लिए एक नई कहानी बनाकर मीडिया को बताकर आत्महत्या बता दी। पुलिस का कहना था कि राजू ने तीन हत्याओं का आरोप लगने पर आत्महत्या की है। उसके शव के पास तीन कीटनाशक भी मिले थे।
हत्यारों को फांसी दिलाने की मांग
सैंजना गांव के महेंद्र पाल उनकी पत्नी सोमवती और भाई ओमकार ने शनिवार को डीएम से मुलाकात करके पूरी घटना का खुलासा करने की मांग की। उनका कहना था कि पुलिस ने उनकी बेटियों की मौत के सच को दबा दिया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। डीएम ने लड़कियों के परिवार वालों को इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया था।