बदलते मौसम में घट रही प्रतिरोधक क्षमता
तापमान के उतार-चढ़ाव से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। वायरस और बैक्टीरिया उनको बीमार बना रहे हैं। रविवार को आरोग्य मेले में 4,254 मरीजों का इलाज हुआ। इनमें सर्वाधिक बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी समेत त्वचा रोगों से पीड़ित रहे। डॉक्टर ने दवाओं के साथ ही संक्रमण से बचाव का सुझाव भी दिया है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक मौसम बदलने पर शरीर को नए तापमान और वातावरण के अनुसार ढलने में समय लगता है। इस समय का मौसम राइनो और इन्फ्लुएंजा वायरस के अनुकूल है। तापमान औसत से कम होने पर वायरस तेजी से बढ़ते हैं। नसें सिकुड़ती हैं। सूरज की रोशनी कम मिलने से विटामिन डी भी कम मिलता है। इससे इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन तेजी से फैलता है।
लोग बुखार, सर्दी, खांसी, फ्लू, एलर्जी, गले, त्वचा आदि से संबंधित रोगों की चपेट में आते हैं। इसके अलावा हवा में धूल के कण, प्रदूषण, फफूंद, परागकण भी एलर्जी की वजह बनते हैं। नाक बहना, बार-बार छींक आना, खांसी और आंखों में जलन आदि की समस्या होती है। इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है।