बरेली। दिनोंदिन खिलती चटख धूप से बढ़ रहा तापमान एक बार फिर मौसम के यूटर्न से करीब छह डिग्री तक लुढ़क गया है। शुक्रवार की सुबह दिन भर रुक रुक कर हुई बारिश ने हल्की ठंड का अहसास करा दिया। मौसम विभाग ने शनिवार को भी बारिश से पारा के लुढकने का सिलसिला जारी रहने के आसार जताए हैं।
आंचलिक मौसम अनुसंधान केंद्र के डारेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक गुरुवार से शहर पर पश्चिमी विक्षोभ हावी हो रहा था। शुक्रवार की देर रात अचानक शहर पर बादल घिरे और रह रह कर दिन भर बारिश करते रहे। दोपहर को सूरज और बादलों के बीच लुकाछिपी भी जारी रही। उन्होंने शनिवार को भी कमोवेश ऐसा ही मौसम बने रहने से तापमान में गिरावट दर्ज होने की आशंका जताई है। डॉ. गुप्ता के मुताबिक शनिवार की सुबह हल्की मध्यम बारिश हुई तो दोपहर में आसमान साफ होने से चटख धूप खिल सकती है। बताया कि हवाओं की दिशा फिलहाल पश्चिम उत्तर पश्चिम है, जो अपने साथ पर्वतों के बादल का जमावड़ा शहर पर लगा रहे हैं। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 25.1 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस रिकॉड किया गया। जबकि बारिश 1.3 एमएम रिकॉर्ड हुई। दो दिन पहले तक अधिकतम तापमान 31 डिग्री था।
चिंता: मौसम का रुख कहीं कोरोना का कहर न बढ़ा दे
बरेली। पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत का रुख कर चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक जल्द ही इसका रुख पर्वतों की तरफ होगा और वहां तेज बारिश के साथ ही ओले गिरने की भी गिर सकते हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इससे कोरोना वायरस का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मगर चिकित्सकों की मानें तो ठंड मौसम वायरस के संक्रमण को बढ़ा सकता है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक कोरोना वायरस का मौसम और तापमान से क्या संबंध है। इस पर अभी कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। क्योंकि यह वायरस महज दो महीने पहले ही अस्तित्व में आया है। हालांकि फ्लू और कोल्ड वायरस ठंड में सक्रिय होता है, जबकि गर्मी में इसमें कमी देखी जाती है। बारिश के बाद तापमान गिरता है और ठंड बढ़ती है, इसलिए कोरोना वायरस में तेजी आने की आशंका बढ़ जाती है। कहा कि ऐसे में लोग अपने-अपने घरों में ही रहें, जब ज्यादा लोग एक-दूसरे के आसपास बने रहेंगे तो इंफेक्शन तेजी से बढ़ने की संभावना होती है। आशंका जताई कि चीन और इटली में वायरस के संक्रमण को बढ़ाने में ठंड ने ज्यादा भूमिका निभाई। क्योंकि लोगों की भीड़ कम नहीं हुई और हवा में तैरते वायरस ने लोगों को तेजी से चपेट में लिया।
नमी की वजह से हवा में तैरता रहता है वायरस
फिजीशियन डॉ. रवीश अग्रवाल के मुताबिक कोरोना वायरस सूक्ष्म कण यानी ड्रॉपलेट से बढ़ने वाली बीमारी मानी गई है, क्योंकि छींकने या खांसने के बाद इसके कण हवा में बिखर जाते हैं। बारिश के बाद, हवा में नमी बनती है और इस स्थिति में आशंका है कि कोरोना वायरस के ड्रॉपलेट हवा में ज्यादा देर तक मौजूद रह सकते हैंद। जैसे-जैसे धूप बढ़ती है वैसे-वैसे हवा में गर्मी बढ़ती है और ऐसे में कोरोना वायरस के ड्रॉपलेट जमीन पर गिरने लगते हैं। इस दशा में इनफेक्शन की संभावना कम होती है, जबकि हवा में तैरते वायरस तेजी से संक्रमण फैला सकते हैं।
पूर्व के वायरस का कुछ यूं रहा ट्रेंड्र
चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना वायरस का तापमान से क्या संबंध है, अभी इस पर रिसर्च चल रही है, लेकिन पूर्व के दो जानलेवा वायरस सार्स और मर्स का ट्रेंड देखें तो उनका प्रसार ठंड में बढ़ा और गर्मी में गिरता चला गया। इसे देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि गर्मी बढ़ने से कोरोना वायरस का प्रभाव भी गिरेगा लेकिन इसका अभी कोई पुख्ता आधार नहीं है।