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मौसम की मार से परेशान किसानों के लिए मुसीबत बना लॉकडाउन

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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पुलिसकर्मी किसानों को खेतों पर नहीं जाने दे रहे, अफसरों से लगाई मदद की गुहार

बरेली। पिछले दिनों मौसम की मार से परेशान किसानों को धूप खिलने के बाद फसल काटने का मौका मिला तो कोरोना के संक्रमण के चलते देश में लॉक डाउन हो गया। तीन से चार माह तक मेहनत के बाद अब खेतों में खड़ी फसल को काटने की बारी आई तो पुलिस किसानों के खेत तक पहुंचने में बड़ी बाधा बने हुए हैं। घर से बाहर निकलने पर किसानों के साथ पुलिस बर्बरता कर रही है। ऐसे में किसानों ने पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों से मांग की है।
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किसानों के मुताबिक लॉकडाउन होने के चलते खाद और बीज की दुकानें बंद हैं। खेतों में फसल खड़ी है। इसमें कुछ किसानों की फसलें कटने लायक भी हो चुकी हैं। अगर वह समय से नहीं काटी जाएंगी तो पक्षी उनकी बालियां तोड़कर थोड़ा खाएंगी और उससे कहीं ज्यादा बरबाद करेंगी। सरकार ने इस लॉक डाउन में किसानों को खेतों पर फसल काटने आदि के लिए राहत दी गई है। फिर भी घर से बाहर निकलने पर पुलिस वाले उन्हें परेशान कर रहे हैं। खाद और बीज की दुकान बंद होने से किसानों को बुवाई और छिड़काव के लिए भी कोई जतन नहीं हो पा रहा है। आशंका जताई है कि अगर पकी फसल पर तेज हवाओं संग बारिश हुई तो फसल गिर जाएगी और दाने बिखर जाएंगे। नवाबगंज, भोजीपुरा, क्यारा, बिथरी चैनपुर, कैंट समेत अन्य ब्लॉकों के किसानों का कहना है कि फसल कभी अकेले नहीं काटी जा सकती है, इसमें काफी लोग लगते हैं।

खेतों में फसल काटना किसी अकेले के वश की बात नहीं है। इसके लिए 10 से 15 लोगों का समूह कटाई में जुटता है तब कहीं जाकर फसल कटती है। मौसम खराब हो रहा है अगर ऐसे में फसल काटकर सुरक्षित नहीं किया जाएगा तो आगे खाद्यान्न का संकट हो सकता है। - डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान
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खेतों में पहुंचकर पुलिसकर्मी किसानों को फसल काटने के दौरान दो से चार लोगों के ही मौजूद रहने का सुझाव दे रहे हैं। अगर कहीं, पुलिस या अन्य किसी के द्वारा किसानों को रोका जा रहा है तो यह गलत है। फसल कटेगी नहीं तो बरबाद हो जाएगी। इसी के साथ पीएम और सीएम की मंशा भी पूरी नही होगी। - अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
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