जिला अस्पताल में चार साल से नहीं हैं ‘दिल’ और ‘दिमाग’ के डॉक्टर
बरेली। जिला अस्पताल में ‘दिल’ और ‘दिमाग’ के मर्ज का इलाज करने वाला कोई चिकित्सक नहीं है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को फिजीशियन और चेस्ट फिजीशियन देखते हैं। डॉक्टर मरीजों को भर्ती होने से पहले ही बता देते हैं कि चार साल से यहां कोई कार्डियोलॉजिस्ट व न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है।
तापमान लगातार गिर रहा है। इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है, लेकिन जिला अस्पताल में इसके विशेषज्ञ ही नहीं हैं। ऐसे मरीजाें की संख्या भी जिला अस्पताल में बढ़ी है, फिलहाल मरीज फिजीशियन से मिलकर सलाह लेकर वापस लौट जाते हैं, लेकिन जो गरीब परिवार से हैं वह यहां रुककर फिजीशियन से इलाज कराते रहते हैं। इमरजेंसी की हालत में आने वाले मरीजों को रेफर ही करना पड़ता है। मार्च 2016 में ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. वीपी भारद्घाज रिटायर हुए थे। इसके बाद से अब तक किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है।
जिला अस्पताल में मनोरोग, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फि जिशियन, नेफ्र ालॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन, डेंटल सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, निश्चेतक, और एक ईएनटी विशेषज्ञ की कमी है। शासन को इस संबंध में कई बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है।
- डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस।
बरतें सावधानियां-
-नमक का सेवन कम करें। मक्खन व घी का प्रयोग भी सीमित मात्रा में करें
-इस मौसम में तरल पदार्थ लेते रहें। ठंडे पानी के बजाय गुनगुना पानी पिएं
-व्यायाम बेहद जरूरी है। पसीना नहीं निकलेगा तो दिल के दौरे का खतरा रहेगा
-प्रदूषण के कारण घर के अंदर व्यायाम करें
-अधिक वसा युक्त चीजें और सिगरेट, शराब आदि का सेवन न करें
हृदय रोगी ध्यान रखें
हृदय रोग से पीड़ितों को अधिक जोखिम रहता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि ठंड में शरीर गर्म होने के लिए अतिरिक्त कार्य तो करता है, लेकिन इस दौरान धमनियों में कोलेस्ट्राल जमने से इसके संकुचित होने की आशंका होती है।
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
अचानक शरीर के एक भाग में कमजोरी आना, मांसपेशियों का विकृत हो जाना, समझने या बोलने में मुश्किल होना। चलने में मुश्किल आना, अचानक सिरदर्द होना और हाथों का सुन्न हो जाना या लटक जाना।