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अस्पतालों में ठंड से प्रभावित मरीज बढ़े

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बरेली। शीतलहर का प्रकोप बढ़ने के साथ ही बीमारियां भी तेजी से पांव पसार रही हैं। सरकारी अस्पताल हों या प्राइवेट, सब फु ल हैं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब ढाई हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर ठंड से प्रभावित होते हैं। जिला अस्पताल में इन दिनों सदी-जुकाम, बुखार, गले में खराश, सीने में दर्द, पेट दर्द आदि के रोगी ज्यादा पहुंच रहे हैं। गुरुवार को एक पीलिया रोगी भी पहुंचा, उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया है। डॉ. वीके धस्माना ने बताया कि एक छोटी से लापरवाही इस मौसम में किसी भी व्यक्ति को बीमार कर सकती है। शीतलहर में कोल्ड स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। शरीर का तापमान जैसे ही 98.08 डिग्री फॉरेनहाइट से घटकर 97 पर पहुंचता है तो शरीर में कंपकंपी होने लगती है। दांत किटकिटाने लगते हैं। यह दिल द्वारा ब्रेन के माध्यम से दिया जाने वाला सिग्नल है कि उसे गर्मी की जरूरत है। अगर इसे नजर अंदाज किया तो कोल्ड स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। अगर शरीर का तामपान 91 से 87 डिग्री फॉरेनहाइट तक गिर जाए तो मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है, जो हाइपोथर्मिया की स्थिति ला देती है। ऐसे में व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
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आशा वर्कर घर-घर जाकर माताओं को करेंगी जागरूक
बरेली। कड़ाके की सर्दी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चे गंभीर हालत में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में अब आशा वर्कर घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी। दरअसल, बच्चों के बड़ी संख्या में कोल्ड डायरिया, निमोनिया, बुखार की चपेट में आने पर शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए आशा वर्कर्स को घर-घर भेजकर माताओं को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा ने बताया कि डायरिया से बच्चे के शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, भूख न लगने की परेशानी शुरू हो सकती है। अगर समय पर उपचार न किया जाए या बीमारी की पहचान समय रहते न हो, तो इससे हालात गंभीर हो सकते हैं। इन्हीं लक्षणों और बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में आशा वर्कर घर-घर जाकर जानकारी देंगी। बच्चे को डायरिया हो जाए तो ठंडी चीजें और चावल नहीं देना चाहिए। गुनगुने पानी से ओआरएस दिया जा सकता है। ठंड से बचाव रखेंगे तो बच्चों को निमोनिया ,सर्दी, खांसी, बुखार जैसी अन्य बीमारियां नहीं होंगी।

बच्चों का ठंड से ऐसे करें बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्मेंद्र ने बताया कि बच्चों में हाथ धोने की आदत डालें। मां भी अगर बच्चे को कुछ खिलाती है तो उससे पहले हाथ धोना बहुत जरूरी है ताकि किसी प्रकार का संक्रमण न फैले। छोटे बच्चों को कंबल में लपेट कर रखें। दूध पिलाने वाली मां को खुद भी सर्दी से बचकर रहना चाहिए।
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