बरेली। बच्चों में कोल्ड डायरिया और निमोनिया होने की आशंका रहती है। थोड़ी सी लापरवाही में ऐसे बच्चे जो पांच वर्ष से कम के हैं, वह जल्दी संक्रमित हो सकते हैं। उनमें कोल्ड डायरिया या फि र निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। कोल्ड डायरिया में भी आम डायरिया की तरह ही उल्टी और दस्त होते हैं। बच्चे को छाती का भी संक्रमण हो जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्मेंद्र का कहना है कि नवजात और पांच वर्ष तक बच्चे में इसके होने की आशंका अधिक रहती है। इस दौरान बच्चे को ठंड से बचाना चाहिए और ओआरएस का घोल देना चाहिए।
कहा कि इस मौसम में बुजुर्ग भी सबसे अधिक बीमार पड़ते हैं। मधुमेह और रक्तचाप के रोगी को इस मौसम में खास ख्याल रखना चाहिए। मधुमेह और रक्तचाप ठंड के मौसम में अनियंत्रित होने की आशंका रहती है। अगर दवा ले रहे हैं तो नियमित लें और नियमित अपने मधुमेह और रक्तचाप की चेकअप करवाते रहें।
खानपान में कर लें बदलाव
तेल मसाला का इस्तेमाल कम ही करें। चर्बी युक्त भोजन नहीं करें। इस दौरान शरीर की सक्रियता कम हो जाती है इसलिए व्यायाम जरूरी है। चाय के साथ तुलसी पत्ते का उपयोग काफ ी लाभकारी साबित होगा। खांसी के लिए यह काफ ी लाभदायक है। इस मौसम में हरी सब्जी का सेवन करना चाहिए। मौसमी सब्जी से शरीर को पोषण आहार और बदलते मौसम से लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित होती है। सुबह टहलने के समय पूरे कपड़े पहनकर निकलें। शहद और गुड़ का सेवन भी लाभकारी है। खानपान से शरीर के इम्यून सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है। अधिक देर तक भूखे नहीं रहें इससे इस मौसम में सेहत पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है।