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फॉरेंसिक लैब के लिए भू परिवर्तन पर काम शुरू

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शासन ने जनता से आपत्ति एवं सुझाव मांगने के दिए निर्देश
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बरेली। सीबीगंज के गांव ट्यूलिया में फोरेंसिक साइंस लैब निर्माण के लिए जमीन का भू उपयोग बदलने के लिए काम शुरू हो गया है। शासन ने इसकी विज्ञप्ति प्रकाशित कराकर आपत्ति एवं सुझाव मांगने को कहा है। इसकी जगह पुलिस दूसरे स्थान पर ग्रीन बेल्ट विकसित करेगी। लैब बनने के बाद विसरा की रिपोर्ट समय से मिलेगी और इस वजह से केस पेंडिंग नहीं रहेंगे।
ट्यिूलिया में 7910 वर्ग मीटर जगह में एफएसएल का निर्माण कराया जा रहा था। इसमें करीब तीन करोड़ 65 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और करीब बीस फीसदी निर्माण हो गया था। करीब साल भर से यह भूमि ग्रीन बेल्ट में आने की वजह से काम रुका पड़ा है। अब लंबी लिखापढ़ी के बाद गुत्थी काफी हद तक सुलझ गई है। अमर उजाला ने भी इस बारे में विसरा को चलाए गए अभियान के दौरान सवाल उठाया था। अब स्पष्ट हुआ है कि पुलिस विभाग को दोगुनी जमीन पर ग्रीन बेल्ट विकसित करने की शर्त पर भूमि का स्वरूप कार्यालय में बदलने की सहमति दी जा रही है। इसके लिए शासन से मिले निर्देश के बाद विज्ञप्ति का प्रकाशन कराया जाना है। पुलिस और कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम के बीच इसे लेकर लिखापढ़ी शुरू हो गई है। यहां लैब बनने पर विसरा की रिपोर्ट जल्दी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। मुरादाबाद में लैब बनने से भी राहत हुई है। पहले विसरा लखनऊ भेजा जाता था जिसकी रिपोर्ट आने में साल भर से ज्यादा लग जाता था।
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एक मामले में विसरा रिपोर्ट आई, बाकी में रिमाइंडर भेजा
बरेली। पिछले दिनों अमर उजाला ने विसरा रिपोर्ट न मिलने की वजह से विवेचनाओं के पेंडिंग होने पर भी सवाल उठाया था। हाफिजगंज थाने के गांव सागर निवासी चतुुरबिहारी की विसरा रिपोर्ट आ गई है। इसमें विषाक्त पदार्थ के लक्षण मिले हैं। इसके साथ ही बड़ेपुरा के सादिक और सोनू व तब्बसीन नाम की महिला की विसरा रिपोर्ट के लिए पुलिस ने रिमाइंडर भेजा है। नवाबगंज पुलिस ने भी पचपेड़ा अस्पताल के डॉ. राजेश की मौत के मामले में रिपोर्ट न मिलने पर लैब को रिमाइंडर भेजा है।
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