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कुमाऊं की बर्फवारी से कांपे शहरवासी

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कुमाऊं की बर्फवारी से कांपे शहरवासी - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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रानीखेत, पिथौरागढ़ समेत उत्तराखंड के पहाड़ों पर भारी हिमपात से बढ़ी सर्दी
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मौसम विज्ञानियों की आज भी बारिश की भविष्यवाणी, हवाएं बढ़ाएंगी और ठिठुरन
शुक्रवार को 27.2 मिमी बारिश से अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री गिरा

बरेली। शुक्रवार को दिन भर हवाओं के साथ लगातार बारिश से पारा लुढ़क गया। अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री कम 16.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया तो न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री नीचे 13.3 डिग्री सेल्सियस तक जा गिरा। ठिठुरन बढ़ी तो सड़कों पर आवाजाही भी कम हो गई। भीड़भाड़ से अटे रहने वाले शहर के प्रमुख बाजारों में दिन में भी सन्नाटे जैसे माहौल दिखाई दिया। मौसम विज्ञानियों ने शनिवार को भी बारिश होने की भविष्यवाणी की है।
मौसम बुधवार से ही बदलना शुरू हो गया था। बादल छाये रहने और हवाएं चलने से तापमान गिरने लगा। बृहस्पतिवार को भी सुबह से बादल छाए रहने के साथ रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। बृहस्पतिवार को आधी रात बारिश शुरू हुई और शुक्रवार को भी बादलों ने सुबह से बरसना शुरू किया तो थमने का नाम ही नहीं लिया। पूरे दिन में 27.2 मिमी बारिश से तापमान में अच्छी-खासी गिरावट आ गई। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एचएस कुशवाहा ने बताया कि आने वाले दिनों में भी बादल छाए रहेंगे, जिससे सर्दी बढ़ेगी। शनिवार को भी बारिश होने की संभावना है। रविवार से मौसम बदल सकता है। हल्के बादल छाये रहेंगे लेकिन धूप भी खिलेगी।
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गोभी-गेहूं को फायदा, आलू, मिर्च और मटर को बचाने की जरूरत
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रंजीत सिंह ने बताया कि यह बारिश गोभी, पालक, मेथी, धनिया, गाजर, चुकंदर, टमाटर समेत मेड़ पर लगने वाली फसल के लिए अच्छी है। मटर और मिर्च के खेत में अगर पानी भर गया है तो उसे तुरंत निकाला जाए, वरना फूल गिर सकता है। बारिश रुकने के बाद धूप निकलने से आलू की फसल को पछेती झुलसा और चिर्रा रोग का खतरा है। गेहूं अगर कुछ दिन पहले बोया गया है तो उसके लिए यह बारिश फायदेमंद है लेकिन अगर एक-दो दिन पहले ही बुआई हुई है तो नुकसान हो सकता है। ऐसे खेतों से तुरंत पानी निकाल देना बेहतरह रहेगा। मौसम खुलने पर दोबारा बुआई भी की जा सकती है।
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