जल निगम की टीम ब्लाक क्षेत्र के गांव मुड़िया हाफिज में गंदा पानी उगल रहे हैंडपंपों की नए सिरे से जांच के लिए शनिवार को एक्सपायर किट लेकर पहुंच गई। जब इस किट से वह पानी चेक करके ग्रामीणों को पानी सही बताने लगी तो किट पर दर्ज 2014 की एक्सपायरी डेट देखकर ग्रामीण खफा हो गए। उन्होंने टीम को दौड़ा दिया। जल निगम के इस रवैये से ग्रामीण नाराज हैं। उनका कहना है कि गंदे पानी को जल निगम वाले सही बताने की कोशिश कर रहे हैं।
‘अमर उजाला’ ने शनिवार को मुड़िया हाफिज गांव के हैंडपंपों से काला और पीला पानी आने और इससे कई लोगों के बीमार होने की खबर छापी थी। इसे प्रशासनिक अफसरों ने गंभीरता से लेकर जल निगम को पानी की जांच करने के आदेश दिए। हालांकि दो दिन पहले भी निगम की टीम पांच हैंडपंपों से पानी के सैंपल ले गई थी। माना जा रहा है कि लैब में वह सैंपल फेल हो चुके हैं। इसको छिपाकर प्रशासनिक अफसरों के सामने अपनी गर्दन बचाने के लिए जल निगम ने दोबारा टीम भेजी। दो सदस्यीय टीम सुबह गांव में पहुंच गई और जांच किट से हैंडपंपों का पानी टेस्ट करने के बाद उस पानी को सही बताकर ग्रामीणों से कागज पर हस्ताक्षर कराने लगी लेकिन ग्रामीण टीम की बात से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि जब हैंडपंपों से पानी गंदा आ रहा है तो शुद्ध कैसे मान लें। इस बीच गांव के मुख्तार अंसारी और महेश गंगवार की नजर टीम के हाथों में मौजूद किट की एक्सपायरी डेट पर पड़ गई, जो साल 2014 की थी। इस बाबत टीम से जब ग्रामीणों ने पूछा तो वह बहानेबाजी करने लगे लेकिन ग्रामीण सारा माजरा समझ गए। उन्होंने टीम से नाराजगी जताई और खूब खरीखोटी सुनाने लगे और टीम को उन्होंने गांव से दौड़ा दिया। इस बारे में जल निगम के अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। वहीं ग्राम प्रधान मोहम्मद उमर का कहना है कि जल निगम की टीम की इस करतूत की शिकायत वह डीएम से करेेंगे।