द्वितीय चरण में बरेली को स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कराने के लिए शहर को आर्थिक मजबूती की जरूरत है। कंसल्टेंट एजेंसी की दूसरी शर्त भी यही है। इस दिशा में हम पिछले चार साल के कामों पर नजर डालें तो नगर निगम, आवास विकास, बीडीए, पीडब्ल्यूडी और आरईएस जैसी एजेंसियां बिना किसी ठोस प्लानिंग के हर साल साढ़े तीन सौ करोड़ से ज्यादा का बजट शहर के विकास पर खर्च करती हैं। मगर, काम फिर भी नजर नहीं आता। खर्च के सापेक्ष वभिन्न मदों में हर साल की आमदनी 80 करोड़ से भी कम है। आमदनी और खर्च में संतुलन बनाकर ही शहर की तरक्की हो सकती है।
नगर निगम के 70 वार्डों में 1.75 लाख से ज्यादा मकान हैं। इनमें 80 फीसदी वार्ड विकास में काफी पिछड़े हैं। औसतन 20 फीसदी एरिया में ही पाश कालोनियां नजर आती हैं। 85 मलिन बस्तियों में एक लाख से ज्यादा परिवार अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी में जीवनयापन कर रहे हैं।
सड़क और नाली निर्माण, सीवर, पेयजल, कूड़े के उठान एवं प्रबंधन, कूड़ा निस्तारण, पार्कों के सुंदरीकरण समेत अन्य मदों पर हर साल सौ करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च होती है। सवा सौ करोड़ नगर निगम के स्टाफ के वेतन भत्तों पर खर्च होती है। आवास विकास और बीडीए भी औसतन 40 से 50 करोड़ लगाकर सड़क और नाली निर्माण के काम करता है। 350 करोड़ खर्च होने के बाद भी ये विकास दिखता नहीं तो इसकी वजह बिना ठोस प्लानिंग के काम करके बजट का दुरुपयोग करना है। कहीं सड़क पहले बनेगी तो बाद में नाली बनाने के लिए उसे तोड़ा जाएगा। अंडरग्राउंड केबिल डालने के लिए नई सड़कें खोदी जाती हैं। वह साल या डेढ़ साल तक ऐसे ही पड़ी रहती हैं। कुप्रबंधन के चलते ट्रैफिक सिस्टम, पर्यावरण प्रदूषण और सीवरेज ही बदहाल है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के काम भी सफल नहीं हो पा रहे हैं।
नगर निगम की हर साल की आमदनी (लगभग में)
अवस्थापना-13 करोड़, विज्ञापन-40 करोड़, 13 वां वित्त-25 करोड़, टैक्स- 22 से 28 करोड़, बाजारों से शुल्क- 42 लाख, रोड कटिंग-1.5 करोड़, जल की बिक्री-दो करोड़ समेत हर साल नगर निगम की विभिन्न स्रोतों से आमदनी 50 करोड़ से भी कम है।
पिछले चार साल में शहर के विकास पर खर्च बजट (लगभग में)
वित्तीय वर्ष बजट खर्च
2012-13 190 करोड़
2013-14 195 करोड़
2014-15 222 करोड़
2015-16 281 करोड़
कुल खर्च 888 करोड़
(बीडीए- 150 करोड़, आवास विकास-70 करोड़)
नगर निगम से हर साल औसतन सवा दो सौ करोड़, बीडीए और आवास औसतन 40 से 50 करोड़ का बजट खर्च करते हैं। चार साल में 1100 करोड़ से ज्यादा बजट खर्च हो चुका है।
शहर का संक्षिप्त विवरण (आंकड़े लगभग में)
प्रस्तावित क्षेत्रफल- 10211 हेक्टेअर (महायोजना 2001 के अनुसार)
विकसित क्षेत्रफल- 3954.86 हेक्टेअर
आवासीय क्षेत्रफल- 3390.00 हेक्टेअर
व्यवसायिक क्षेत्रफल- 3823.00 हेक्टेअर
यातायात एवं परिवहन- 1009.00 हेक्टेअर
रेलवे के आधीन भूमि- 1769.00 हेक्टेअर
कृषि भूमि- 264.80 हेक्टेअर
कुल जनसंख्या- 11 लाख (लगभग)
मुख्य मार्ग - 100
छोटी सड़कें और गलियां - 1800
बड़े और छोटे नाले - 133
गली मोहल्लों में छोटी नालियां- 2100
70 वार्डों में कुल पार्क- 130
कुल आवासीय मकान- 1.75 लाख
व्यवसायिक प्रतिष्ठान - 07 हजार
अवैध कालोनियां- 250
‘बरेली को स्मार्ट बनाने के लिए आठ अहम बिंदु हैं। इन पर प्लानिंग बनाकर ठोस कदम उठाने होंगे। नगर निगम की आमदनी के स्रोत और प्रति व्यक्ति आमदनी बढ़ाकर ही शहर को आर्थिक विकास के रास्ते पर ले जाया जा सकता है।’ मुजीबुर्रहमान, प्लानिंग हेड, कंसल्टेंट एजेंसी