अनलॉक-2 की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कोरोना संक्रमण के मामलों के साथ ही, संक्रमितों की मौत का आंकड़ा भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा है। बावजूद इसके लोग न संभल रहे हैं और न नाजुक होते हालात को समझ रहे हैं। हालांकि, अब तक जितने भी संक्रमितों की मौत हुई है, वे सभी गंभीर रोगों से भी ग्रसित थे, लेकिन मौतों का ग्राफ इसी तरह बढ़ता रहा तो कोरोना की भयावहता से बचना मुश्किल होगा। शहर के प्रमुख चिकित्सकों का यही कहना है- अब भी वक्त है लोग संभल जाएं.. अन्यथा स्थिति विकराल हो जाएगी।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक, सिर्फ कोरोना संक्रमण से ही मौत होने का यूं तो अब तक एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन इसे लेकर लापरवाह हो जाना ठीक नहीं है। संक्रमण के डर से बीमार या बुजुर्ग घर से बेहद जरूरी काम पर ही बाहर निकलते होंगे, लेकिन अन्य परिजन जरूर बाहर जाते होंगे। एसिम्पटोमैटिक होने की वजह से उनमें संक्रमण हावी भले न हो फिर भी वह बुजुर्ग और बीमार परिजन के लिए खतरा बन सकते हैं। लिहाजा, जिनके परिवार में ऐसे लोग हैं वे पूरी एहतियात बरतें।
आंकड़े: कब, किस संक्रमित की हुई मौत
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 21 जून को जिले में कोरोना संक्रमित रहे मरीजों की मौत का आंकड़ा महज तीन था, लेकिन इसके अगले दिन से ही सिलसिला शुरू हो गया। 22 जून को एक महिला की मौत हुई। इसके अगले ही दिन लखनऊ में इलाज करा रही एक महिला और बरेली के कोविड अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग की मौत हो गई। 26 और 27 जून को तीन कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। 28 और 29 जून को भी एक-एक मौत हो गई। एक जुलाई को एक, दो जुलाई की देर रात एक और फिर तीन जुलाई को दो मौतें हो गईं। इस तरह महज 14 दिन यानी दो सप्ताह में ही कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 15 पर पहुंच गया।
कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है मृत्यु दर
आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक, प्रवासियों की वापसी के बाद संक्रमितों की तादाद में बढ़ोत्तरी हुई। एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों की तादाद ज्यादा रही, इसमें अब बदलाव देखा गया है। करीब दस दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 52 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसमें 31 मरीज सिम्टौमेटिक हैं यानी उनमें कोरोना के लक्षण हैं। इससे जाहिर है कि वायरस का ट्रेंड फिर बदला है। वह माइल्ड से मॉडरेट की ओर बढ़ रहा है। इसे सीवियर होने से रोकने की जिम्मेदारी प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के साथ ही आम लोगों की भी है।
अपमानित होने का डर भी बढ़ा रहा संक्रमण
संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार की कामना करने के बजाय लोग वीडियो बनाकर वायरल कर उसे अपमान का एहसास कराते हैं। ऐसे में संक्रमित अपराधबोध से ग्रस्त हो जाता है। यही वजह है कि वे लोग जिनमें कोरोना के लक्षण हैं और वे जागरूक भी हैं, लेकिन फिर भी अपमान से बचने के लिए जांच ही नहीं करा रहे हैं। समाज की उपेक्षा भी संक्रमण को बढ़ावा दे रही है। इन हरकतों पर विराम लगाना होगा, क्योंकि देश को बीमारी से लड़ना है बीमार से नहीं।
कोरोना संक्रमित किसी भी व्यक्ति की मौत न हो इस बाबत उच्चाधिकारियों से भी निर्देश मिले हैं। मृत्युदर कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा संक्रमितों को ट्रेस करना जरूरी है। इनमें से कई उम्रदराज और गंभीर रूप से बीमार लोग भी होंगे, जिन्हें समय से इलाज मिलना जरूरी है। फिलहाल जिले में जो भी मौतें हुईं हैं, उनमें से एक भी मौत की वजह सिर्फ कोरोना नहीं रहा है।
- डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी