बरेली। जिला अस्पताल में मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। टीबी वार्ड फुल होने से सामान्य मरीजों को भर्ती करने के लिए बनाए गए मेल मेडिकल वार्ड में सामान्य मरीजों के साथ ही टीबी के संदिग्ध मरीजों को भी भर्ती किया जा रहा है। संदिग्ध मरीजों के मास्क भी न लगाने की वजह से सामान्य मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा है।
जिला अस्पताल में टीबी ग्रसित मरीजों के लिए 18 बेड का वार्ड बना हुआ है। यहां रविवार को कुल 20 मरीज दोपहर तक भर्ती मिले। एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। बेड कम होने की वजह से टीबी के दो संदिग्ध मरीजों को मेल मेडिकल वार्ड में भर्ती कर दिया गया।
मेल मेडिकल वार्ड में सामान्य बीमारियों जैसे-बुखार, सांस लेने में दिक्कत समेत अन्य मरीज भर्ती किए जाते हैं। यहां भर्ती किला के लीची बाग निवासी 40 वर्षीय युवक और बदायूं जिले के एक गांव निवासी 33 वर्षीय महिला ने मास्क भी नहीं पहना था।
पूछने पर स्टाफ ने बताया कि दिन में कई बार टीबी के संदिग्ध मरीजों और उनके तीमारदारों को मास्क लगाने के लिए कहा जाता है। टोकने पर मास्क तो लगा लेते हैं लेकिन स्टाफ के जाते ही फिर स्थिति पहले जैसी हो जाती है। कई बार तो मरीजों के बेड पर ही तीमारदार लेटे हुए मिलते हैं। इन्हें ऐसा करने से बार-बार मना किया जा रहा है।
टीबी मरीज ने तोड़ा दम
भोजपुरा निवासी 40 वर्षीय मरीज की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। यह मरीज गंभीर हालत में रविवार को पूर्वाह्न करीब 10 बजे इमरजेंसी पहुंचा। यहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे टीबी वार्ड में भर्ती किया। करीब दो घंटे बाद मरीज ने दम तोड़ दिया। इस संबंध में ईएमओ डॉ. हरीश चंद्रा ने बताया कि मरीज का लंबे समय से टीबी का इलाज चल रहा था। जांच के बाद फौरन भर्ती कर मरीज का इलाज आरंभ किया लेकिन सांस लेने की दिक्कत के चलते मरीज की मौत हो गई।
ये बरतें सावधानियां
- टीबी वार्ड में प्रवेश करने से पहले सर्जिकल मास्क लगाना जरूरी है।
- टीबी के मरीजों से कम से कम तीन मीटर की दूरी से बात करनी चाहिए।
- मरीज को हर समय मास्क लगाना अनिवार्य है।
- संदिग्ध या संक्रामक टीबी मरीजों को अन्य मरीजों से अलग रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- अगर संदिग्ध मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती करना पड़े तो संक्रमण नियंत्रण के जरूरी उपाय अपनाए जाएं।
वर्जन :
टीबी वार्ड फुल होने के चलते मरीजों को असुविधा न हो इसके लिए अन्य वार्डों में भर्ती किया जाता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद टीबी की पुष्टि होने पर फौरन मरीज को टीबी वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। - डॉ. आरसी दीक्षित, एडीएसआईसी