बरेली। जिले की पुलिस ने बड़े तस्करों को वॉकओवर दे रखा है। सिर्फ प्यादों को पकड़कर कार्रवाई के नाम पर खानापूरी की जा रही है। पुलिस की हालिया कार्रवाई इस बात का प्रमाण है। सूत्र बताते हैं कि देहात के चर्चित इलाकों से मादक पदार्थों की सप्लाई जारी है।
पूर्वोत्तर इलाकों से सस्ती अफीम मंगाने, स्थानीय स्तर पर उसको मिलावट कर तैयार करने और फिर कैरियरों के जरिये दिल्ली तक पहुंचाने वाले तस्कर खामोशी से करोड़ों का धंधा कर रहे हैं। फरीदपुर का बेहरा गांव स्मैक तस्करों का गढ़ माना जाता है। गांव के बड़े तस्करों का नेटवर्क दिल्ली, उत्तराखंड तक फैला है। जिले में भी बेहरा से स्मैक की सप्लाई हो रही है। पुलिस बेहरा से स्मैक लाने वालों को पकड़ रही है, लेकिन वहां बैठकर कौन स्मैक बेच रहा है, इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
तीन दिन पहले फरीदपुर पुलिस ने केसरपुर ईंट भट्ठे से बारादरी के हजियापुर निवासी लतीफ उर्फ चांद, बारादरी के दुर्गानगर गौटिया निवासी राहुल उर्फ अश्वनी और इज्जतनगर के परतापुर चौधरी निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया था। आसिफ मूल रूप से भमोरा के शादीपुर क्योना गांव का निवासी है। तीनों के पास से स्मैक बरामद हुई थी। तीनों ने बताया था कि वे ट्रक चलाने वालों को स्मैक बेचते हैं। शहर में रहने के कारण यहां भी आसानी से सप्लाई करते हैं।
तीनों तस्करों ने स्वीकार किया कि वे फरीदपुर के बेहरा से स्मैक खरीदकर लाते हैं। पुलिस के मुताबिक तीनों ने यह नहीं बताया कि वह बेहरा के किस तस्कर से स्मैक लाते हैं? ऐसे में पुलिस अब तक उस स्मैक तस्कर को चिह्नित नहीं कर सकी है। तस्करों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई में भी खेल होने की चर्चा है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने एक से अधिक आरोपियों के पकड़े जाने और बरामद माल के व्यावसायिक इस्तेमाल की स्थिति में हर आरोपी पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस लिहाज से हाल में पकड़े गए करीब 50 नए आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई हो सकती है। एसएसपी ने बताया कि जल्दी ही वह कार्रवाई की समीक्षा करेंगे और तस्करों पर शिकंजा कसा जाएगा।