जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर मजाक हो रहा है। अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। वेटिंग के नाम पर मरीजों को लौटाया जा रहा है। शनिवार को आशा के साथ आई 10 गर्भवती महिलाआें को बिना जांच के ही लौटा दिया गया। एक आशा ने हंगामा किया तो शाम साढ़े चार बजे तक उसकी पांच महिलाआें का अल्ट्रासाउंड किया गया। खास बात यह है कि उनकी वेटिंग अप्रैल से थी। अल्ट्रासाउंड सेंटर के स्टॉफ के ऊपर पैसे लेकर जांच के आरोप लगे हैं। पांच अन्य महिलाएं जांच न होने से लौट गई।
भोजीपुरा की आशा शिववती साहू के साथ वीरपुर मकरूखां गांव की पांच गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड जांच के लिए आई थी। इनमें सुमन, ऊषा, उर्मिला, व अन्य दो महिलाएं शामिल हैं। किसी का पांच तो किसी महिला का सात माह का गर्भ है। लेकिन अब तक एक बार भी अल्ट्रासाउंड नहीं कराया गया। अप्रैल की 30 तारीख को इनका फार्म भरा गया था, लेकिन रोज देरी होने की बात कहकर अस्पताल वाले लौटा देते थे। शनिवार को भी इन्हें लौटाया गया तो आशा शिववती साहू ने डॉक्टरों से खूब बहस की। सीएमएस से शिकायत की तो शाम चार बजे पांचों महिलाआें की जांच हुई। इससे पहले क्यारा ब्लाक के बारीनगला गांव की आशा सहौद्रा आशा की पांच महिलाओं को भी लौटा दिया गया।
आशा को अपनी बहू का प्राइवेट में कराना पड़ा अल्ट्रासाउंड
आशा साहू ने बताया कि उनकी बहू सुनीता को चार महीने का गर्भ था। महिला अस्पताल में डॉक्टरों से कहती रहीं कि अल्ट्रासाउंड जांच लिख दें, लेकिन नहीं लिखा गया। प्राइवेट में जांच कराई तो गर्भ में पल रहे बच्चे का सिर नहीं था। महिला अस्पताल में गर्भपात कराया गया। आशा ने बताया कि ऐसे गंभीर मामले में जांच कराने के लिए डॉक्टर तैयार नहीं होते हैं।
पैसे लेकर करते हैं जांच
महिला और पुरुष अस्पताल में एक-एक अल्ट्रासाउंड मशीन है। रोज 40-40 अल्ट्रासाउंड कराए जाने नियम है जबकि मरीज ज्यादा आते हैं। आशाआें ने आरोप लगाया कि 25 और 29 नंबर की महिलाएं बैठी रह गई जबकि अन्य मरीज का पहले कर 40 का कोटा पूरा कर दिया। इस पर स्टॉफ के ऊपर पैसे लेने का भी आरोप लगा।
कोट
फोन से जानकारी मिली तो मैंने अल्ट्रासाउंड करवा दिया। आशा मेरे पास शिकायत लेकर नहीं आई। अगर ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। सोमवार को जानकारी करूंगी।
-डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस