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सरकारी डॉक्टर की मौत के मामले में भी लटकी है विसरा जांच

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कब्र से निकाले शवों के मामलों में भी रिपोर्ट का इंतजार, पैरवी पर भी नहीं सुनती लैब

बरेली। जिले में विसरा रखने को लेकर बरसों से चल रही बदइंतजामी तो सुधर गई पर थानों से जांच को भेजे गए विसरा के तमाम सैंपल लैबों में अब भी पड़े हैं। देहात इलाके के थानों में इसकी समस्या ज्यादा है। ज्यादा पैरवी करने पर भी लैब नहीं सुनती, इसकी वजह से मामलों में चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट नहीं लग पाती और कार्रवाई फंसी रहती है।
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नवाबगंज की पचपेड़ा पीएचसी के डॉ. राजेश कुमार की मौत के मामले की विवेचना विसरा की जांच रिपोर्ट न आने से लटकी हुई है। लखीमपुर खीरी जिले के निवासी डॉ. राजेश का पीएचसी आवास के शौचालय में मिला था। पोस्टमार्टम में मौत की सही वजह सामने न आने पर विसरा सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजा गया, लेकिन नवाबगंज पुलिस को अब तक रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। इंस्पेक्टर इसके लिए लैब को रिमाइंडर भी भेज चुके हैं। नवाबगंज के ही बरौर गांव की तब्बसीन पत्नी हाफिज मोहम्मद अयूब की मौत 16 फरवरी को हो गई थी। कुछ दिन बाद मायके वालों ने शिकायत की तो डीएम के आदेश पर कब्र से शव निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया गया। इसमें वजह साफ न होने पर विसरा भेजा गया। इसकी रिपोर्ट भी नहीं मिली है। ऐसा ही मामला हाफिजगंज के बढ़ेपुरा गांव का है। वहां के युवक का शव भी कब्र से निकलवाया गया। इसकी विसरा जांच भी लटकी हुई है।
भोजीपुरा के विवियापुर गांव निवासी राम बहादुर के दामाद पप्पू की करीब पांच महीने पहले ससुराल में मौत हो गई थी। उसके परिवार ने बेटे के ससुरालवालों के खिलाफ रिपोर्ट करा दी। पुलिस को मौत की वजह पोस्टमार्टम से पता नहीं लगी तो विसरा जांच को भेजा गया। कई महीने से रिपोर्ट न मिलने से पुष्टि नहीं हो पा रही कि मौत की सही वजह आखिर क्या थी। इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि विसरा रिपोर्ट आने पर तय किया जाएगा कि केस में एफआर लगनी है या चार्जशीट।

मॉडर्न पोस्टमार्टम हाउस और मुरादाबाद लैब से राहत

बरेली जिले में चार साल पहले तक विसरा की दुर्दशा होती थी। तब न तो इनके रखने की सही जगह थी और न ही लखनऊ की लैब से जल्दी रिपोर्ट मिल पाती थी। मॉडर्न पोस्टमार्टम हाउस में यूं तो विसरा रखने के लिए अलग से कक्ष बनाया गया है पर एसएसपी के आदेश के बाद उसका इस्तेमाल करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। यहां पोस्टमार्टम के दौरान ही विसरा संबंधित थाना पुलिस को दे दिया जाता है ताकि उसे जल्दी जांच के लिए भेजने का पुलिस पर भी दबाव बना रहता है। कुछेक मामलों को छोड़कर अधिकांश विसरा तत्काल ही लैब भेज दिए जाते हैं। लखनऊ के बाद आगरा और अब नजदीक में मुरादाबाद में फोरेंसिक लैब खुलने के बाद भी वक्त पर रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है।

बरेली में भी बन रही है फोरेंसिक लैब

बरेली के ट्यूलिया गांव में भी फोरेंसिक लैब का निर्माण हो रहा है। कई करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट 50 फीसदी पूरा भी हो गया है, लेकिन अब ग्रीनबेल्ट की भूमि का मामला सामने आने की वजह से निर्माण रुक गया है। कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा हुआ तो विसरा रिपोर्ट संबंधी समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।

छह महीने तक ही सुरक्षित रहता है विसरा

किसी व्यक्ति की मौत के बाद रासायनिक परीक्षण के लिए मृतक के लीवर, किडनी, आंत समेत अन्य अंग निकाल लिए जाते हैं। जहर या ऐसी ही किसी अन्य वजह इसके परीक्षण से पता कर ली जाती हैं। इसे नमक के पानी और केमिकल में संरक्षित करके लैब भेजा जाता है। जानकारों के मुताबिक विसरा छह महीने तक सही स्थिति में रहता है। इसके बाद जांच होने पर रिपोर्ट में कुछ समस्या आ सकती है। वैसे केमिकल काफी समय तक इसे सुरक्षित रख सकता है। कई बार जार लीक होने या गिरने पर जब केमिकल बह जाता है तो विसरा भी नष्ट हो जाता है।
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विसरा के रखरखाव को लेकर जिले में कोई समस्या नहीं है। विवेचकों को निर्देश दिए गए हैं कि पोस्टमार्टम के बाद अगर विसरा सुरक्षित किया गया है तो उसे तत्काल लैब भिजवाने की व्यवस्था करें। कई बार लैब से रिपोर्ट आने में देरी हो जाती है, इसकी वजह से समस्या होती है। बरेली में फोरेंसिक लैब तैयार होने पर यह दिक्कत भी खत्म हो जाएगी। - डॉ. संसार सिंह, प्रभारी एसएसपी
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