सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के इस्तीफे पर हाईकमान की चुप्पी ने पार्टी नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। हाईकमान को इस्तीफा मिला नहीं या फिर पार्टी के बड़े नेता 24 साल से ज्यादा समय से बरेली के जिलाध्यक्ष रहे वीरपाल का इस्तीफा स्वीकार करने या ना करने पर निर्णय नहीं ले पा रहा है। वीरपाल के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद सपा बरेली में फिलहाल नेतृत्वविहीन सी हो गई है।
सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के इस्तीफे के बाद सबकी नजरें हाईकमान के फैसले पर हैं। सपा के बड़े नेता वीरपाल का इस्तीफा मिलने की जानकारी मिलने से ही इनकार कर रहे हैं। हालांकि इस्तीफा देने की खबर अखबारों से लेकर सोशल मीडिया के जरिए हाईकमान तक पहुंच चुकी है। फिर भी हाईकमान चुप है जिससे सपा नेताओं के साथ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओें की धड़कने भी बढ़ गई हैं। पार्टी सुप्रीम मुलायम सिंह यादव के नजदीक समझे जाने वाले वीरपाल सिंह यादव 1980 से 90 तक राष्ट्रीय लोकदल के महासचिव रहे। 1990 में समाजवादी जनता पार्टी और उसके बाद मुलायम के नई पार्टी बनाने पर 2016 तक (सिर्फ ढाई साल छोड़कर) लगातार 24 साल सपा के जिलाध्यक्ष रहे। बीच में एक साल के लिए भगवतसरन गंगवार और डेढ़ साल के लिए तारा सिंह सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था तो वीरपाल मंडल अध्यक्ष थे। इतने लंबे समय से संगठन पर काबिज वीरपाल सिंह यादव का अचानक इस्तीफा देने से न केवल उनके समर्थकों को झटका लगा है बल्कि सपा नेतृत्व विहीन सी लग रही है। वीरपाल के कद का दूसरा नेता न होने से भी पार्टी नेतृत्व को जिलाध्यक्ष पद पर निर्णय लेना कठिन हो रहा है। इधर वीरपाल विरोधियों के खेमे में चर्चा रही कि वीरपाल ने इस्तीफा दिया नहीं लिया गया लेकिन इस बारे में भी कोई पुष्टि नहीं है वीरपाल इसे गलत बताते हैं।
मैंने 24 साल पार्टी निर्विवाद तरह से चलायी और मैं संतुष्ट हूं। अब मैंने जिम्मेदारी वापस कर दी। बतौर अध्यक्ष जिले के हर कार्यक्रम में मेरा होना जरूरी होता है, मैं इस तरह अध्यक्ष पद से न्याय नहीं कर पा रहा हूं। अब अपने चुनाव क्षेत्र पर फोकस करना चाहता हूं।
- वीरपाल