बरेली। जिले में 294 कलस्टर में 190 सचिव तैनात हैं। ऐसे में सचिवों पर अतिरिक्त कलस्टर होने की वजह से पंचायत स्तर पर विकास कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश सचिव पंचायत भवनों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ब्लॉक मुख्यालय में ही डटे रहते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को 16 जरूरी प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के लिए कई किलोमीटर दूर ब्लॉक व जिला मुख्यालय का चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिले में 1188 ग्राम पंचायत हैं। इन ग्राम पंचायतों को शासन के निर्देश पर जिला पंचायत राज विभाग की ओर से आबादी के हिसाब से कलस्टर बनाकर बांटा गया है। ऐसे में जिले में 294 बने हैं। इन कलक्टर पर 190 सचिवों को तैनात दी गई है। ऐसे मेें कई सचिवों को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। ऐसे में सचिव अतिरिक्त प्रभार होने का फायदा उठाते हैं। जब मन होता है तो ग्राम पंचायतों में जाते हैं। इसकी वजह से ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, जाति और निवास जैसे 16 प्रमाण पत्रों को बनवाने के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है। संवाद
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यह होता है कलस्टर
एक कलस्टर में 10 से 12 हजार की आबादी शामिल होती है। ऐसे में कुछ ग्राम पंचायतों को जोड़कर एक कलस्टर तैयार किया जाता है। नियमानुसार एक कलस्टर पर सचिव की तैनात की जाती है ताकि वह संबंधित क्षेत्र में विकास कार्यों में तेजी ला सके।
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क्या बोले लोग
ब्लॉक रामनगर निवासी प्रताप सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पंचायत सचिवों की संख्या बढ़ाई जाए। उन्हें रोस्टर के अनुसार पंचायत भवनों पर बैठने के लिए निर्देशित किया जाए। साथ ही उनकी उपस्थिति को प्रमाणित करने के लिए हस्ताक्षर की व्यवस्था तय स्थानों पर की जाए। जिससे पारदर्शिता बनी रहे। और जनता को राहत मिले। ब्लॉक भदपुरा निवासी रामनिवास का कहना है कि सचिव के बैठने के रोस्टर की सही जानकारी नहीं हो पा रही है। सचिवों की मनमानी से पंचायत स्तरीय योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
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कलस्टर के सापेक्ष सचिवों की संख्या कम है। ऐसे में सचिवों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। साथ ही इनके बैठने के संबंधित क्षेत्र में समय से बैठने के लिए निर्देशित किया गया है। अगर कोई सचिव इसमें लापरवाही करता हुआ मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-महेंद्र सिंह, उपनिदेशक पंचायत बरेली