शहर के प्रमुख कारोबारी मनु ढींगरा कहते हैं कि शुरू में संतोष गंगवार का पर्चा कटने को लेकर बहुत नाराजगी थी, लेकिन अब लगता है कि कोई नाराजगी नहीं है। पिछले 10 वर्ष के बदलाव और प्रदेश में सुरक्षित माहौल को ही हमने मुद्दा बनाया है।
UP: 'चुनाव प्रभावित कर रही पुलिस, सपा कार्यकर्ताओं को उठाया'; मतदान से पहले शिवपाल यादव का बड़ा आरोप
काशी धर्मपुर के बसपा कार्यकर्ता हरिश कुमार अपने उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने पर कहते हैं, इतने चुनाव हुए अभी तक हमारे उम्मीदवार का पर्चा रद्द नहीं हुआ, लेकिन इस बार रद्द करवा दिया। हमारे वोट के अधिकार पर चोट हुई है। इसका जवाब हम देंगे।
आला हजरत दरगाह के पास दुकानदार जुनौद कहते हैं कि इस बार चुनाव में कोई शोर नहीं है, महंगाई, बेरोजगारी है लेकिन ये भी मुद्दे नहीं हैं।
मुकाबला रोमांचक होने के आसार
भाजपा पहली बार इस सीट पर इतना जोर लगा रही है। इससे साफ़ है कि यहां मुकाबला दिलचस्प और कांटे का है। अच्छी तादाद में मुस्लिम मतदाता होने के बावजूद वर्ष 1989 के बाद हुए अब तक नौ चुनावों में महज एक बार वर्ष 2009 में कांग्रेस जीत सकी थी। इस बार संतोष गंगवार का टिकट कटने के बाद भाजपा में मचे सियासी घमासान से विपक्ष की उम्मीदें जाग गईं।
चुनावी मौसम के परवान चढ़ने के साथ ही भाजपा ने भितरघात रोकने के लिए पीएम मोदी के रोड शो और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों की जनसभाओं से हिंदू मतदाताओं को रिझाने की पुरजोर कोशिश की है। दूसरी तरफ सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी यहां रैलियों के जरिये माहौल बनाया है।