कई विषयों पर हुआ संवाद
दूसरे सत्र की शुरुआत 'तानाशाही के दौर में गांधी' विषय पर लेखक अशोक कुमार पांडेय और पुष्यमित्र के संवाद से हुई। इसमें 20वीं सदी की तानाशाही, गांधी जी के विचार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्न पर चर्चा हुई। 'बिसरी हुई सल्तनत का आख्यान' विषय पर मध्यकालीन इतिहास के गुलाम वंश के दौर की कथा पर आधारित तरुण भटनागर के उपन्यास 'मामलुक' पर चर्चा हुई। आलोचक संजीव कुमार ने लेखक तरुण भटनागर से संवाद किया।
अगले कार्यक्रम में 'गांधी का सैंतालिस आज का भारत' विषय पर पुष्यमित्र से शिक्षिका एवं लेखिका स्मृति सुमन ने संवाद किया। 'बढ़ता पर्यटन और जैव विविधता के खतरे' विषय पर हिमालय यात्री अजय सोडानी से लेखक-पत्रकार प्रभातसिंह ने संवाद किया। इस दौरान प्रभात सिंह ने अपनी पुस्तक 'दरख्ते हिमालय दरबदर' से अंशपाठ भी किया।
'पारसी रंगमंच 1960 से परदा गिरने तक' विषय पर फिल्म निर्माता एवं संस्कृतिकर्मी सीमा कपूर से अभिनेता रघुवीर यादवकिया। इसमें पारसी थिएटर के यायावर जीवन, संघर्ष, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण की ऐसी कहानियां सामने आईं, जिनसे पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। 'कविता बीच संसार' में गायिका दीपा शानी और रंगकर्मी किरण शानी ने प्रस्तुतियां दीं।
किताब उत्सव के मेहमान बने रुहानी महफिल का हिस्सा
विंडरमेवर थिएटर में राजकमल प्रकाशन की ओर से आयोजित किताब उत्सव में आए मेहमान और आयोजक रविवार को विश्वप्रसिद्ध स्थल खानकाह नियाजिया में सजी रुहानी महफिल का हिस्सा बने। वे लोग खानकाह के सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां की दावत पर पहुंचे थे। इस मौके पर खानकाह में कव्वाली की विशेष महफिल में फनकारों ने सूफियाना और अदबी कलाम पेश किए।
इससे पहले सभी मेहमानों की साहिबे सज्जादा मेहंदी मियां और प्रबंधक जुनेदी मियां से मुलाकात हुई। मेहमानों की अगुवाई मौलाना कासिम नियाजी ने की। इनमें राजकमल प्रकाशन के सीईओ आमोद माहेश्वरी, संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह आदि शामिल रहे।