25 मिनट में 35 वाहनों की जांच
स्कूली वाहनों में कैमरों की भी जांच की गई। पुरानी बाइकों की भी फिटनेस हुई। करीब 25 मिनट में 35 वाहनों की जांच करके वह चले गए। इसके बाद भी करीब 10 वाहन जांच के लिए शेष रह गए। इनके संचालक इंतजार ही करते रह गए। यहां मिले आसिफ ने कहा कि बाइक की फिटनेस की जांच कराने आए हैं। आरआई के जल्द चले जाने की वजह से काम हो ही नहीं पाया।
केस - एक
आशापुरम के जेसीबी संचालक ने बाहरी व्यक्ति पर 10 हजार रुपये लेकर फिटनेस जांच करने का आरोप लगाया। कहा कि काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी मंगलवार को काम नहीं हो पाया।
केस- दो
डीआरएम इंटर कॉलेज आंवला की बस परमिट के लिए पहुंची। बस चालक ने उतरते ही लोगों से पूछा कि मेरा कागज यहां किसके पास मिलेंगे। इसके बाद वह बाहरी व्यक्ति से मिला। कुछ ही देर बाद चालक को संबंधित कागज उपलब्ध करा दिए गए। आरआई के आने पर ये कागज उन्हें दिखाने के लिए कहा गया।
एआरटीओ प्रशासन प्रवेश कुमार सरोज ने बताया कि बाहरी व्यक्तियों का व्यवस्था में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं है। यहां पर सिर्फ उन निजी वाहनों की फिटनेस की जांच की जाती है, जिनके पंजीकरण को 15 वर्ष बीत चुके हों। वसूली के जो आरोप लगे हैं, उनकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एप पर अपलोड नहीं कर रहे जानकारी, 450 बसों का ही विवरण ऑनलाइन
परिवहन विभाग की तरफ से स्कूली वाहनों के लिए अभियान चलाने के बावजूद अब तक महज 450 बसों का विवरण ही ऑनलाइन किया गया है। परिवहन विभाग जागरूक भी कर रहा है, इसके बाद भी ऐसी स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में आगरा व अलीगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में स्कूली छात्राओं की मौत के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। सीएम ने सभी विद्यालयों में संचालित वाहनों का बीमा, फिटनेस, परमिट, चालक की पात्रता एवं अन्य वैधानिक अभिलेखों का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा।
इसी क्रम में स्कूली वाहनों की प्रभावी निगरानी एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफार्म यूपी-आईएसवीएमपी लांच किया गया। एक से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान के क्रम में इस पोर्टल पर स्कूलों में संचालित वाहनों के दस्तावेजों को अपलोड करना है। पोर्टल पर पंजीकृत एवं सत्यापित वाहनों को ही वैध माना जाएगा। एक सप्ताह में बरेली के अंदर 40 वाहनों का चालान किया गया। इसमें इनकी फिटनेस, इश्योरेंस की जांच की गई। साथ ही करीब चार लाख रुपये जुर्माना भी वसूला गया।
आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में संचालित वाहनों का यूपी-आईएसवीएमपी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। इस संबंध में किसी भी प्रकार की छूट व शिथिलता अनुमन्य नहीं होगी। स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।