अरब सागर से उठे चक्रवाती तूफान ‘ओखी’ के कहर से फल और सब्जियों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। हालांकि सर्दी बढ़ने के बाद अगर कोहरा हुआ तो रबी की फसल गेहूं, सरसों, गोभी और मटर को फायदा होगा क्योंकि इन फसलों को दिसंबर में ठंडी जलवायु की जरूरत होती है। अगर ज्यादा दिन सूरज नहीं निकला तो सब्जी और फल के पौधों में चिर्रा या झुलसा रोग लगने की आशंका है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गुजरात से बंगाल की खाड़ी की ओर तीव्र गति से बढ़ रहे चक्रवाती तूफान ‘ओखी’ के असर से आसमान में बादल छाये रहने से रबी की फसलों को तो फायदा है लेकिन सब्जी और बागवानी को नुकसान है। ‘ओखी’ का असर अगर चार दिन ही रहा तो रबी की फसल गेहूं, सरसोें, मटर और गोभी के पौधों को मजबूती मिलेगी। इन फसलों को दिसंबर और जनवरी में ठंडी जलवायु की जरूरत होती है। हालांकि रबी की फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए सर्दी के साथ कोहरा पड़ना और कभी-कभी धूप निकलना भी जरूरी है। मशरूम का उत्पादन भी बेहतर होने के आसार हैं। दूसरी ओर ज्यादा दिन धूप न निकलने और रात का तापमान आठ डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने से आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, बैंगन, फूल गोभी, टमाटर जैसी सब्जियों में ‘चिर्रा’ या झलसा रोग लग सकता है। फलदार अमरूद, पपीता, केला, नीबू आदि के पौधे ज्यादा सर्दी पड़ने पर झुलसकर पीले पड़ सकते हैं।
बचाव के उपाय
आईवीआरआई के कृषि एवं बागवानी वैज्ञानिक डॉ. रनजीत सिंह का कहना है कि अधिक दिन तक धूप न निकलने पर किसान रबी की फसलों के अलावा फल और सब्जी के पौधों को थोड़ा-थोड़ा पानी देकर जमीन में नमी बनाए रखें, इससे उनमें रोग लगने की संभावना कम हो जाएगी। झुलसा या चिर्रा लगने पर डाइईथेनएम-45 का 900 सौ ग्राम पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।