बाघ एक्सप्रेस में प्रस्तावित हैं एलएचबी कोच
13020-19 काठगोदाम-हावड़ा बाघ एक्सप्रेस में एक साल से एलएचबी कोच प्रस्तावित हैं, लेकिन एलएचबी रैक न मिलने के कारण यह ट्रेन भी पुराने आईसीएफ कोच की रैक के साथ अप-डाउन 3,028 किमी की यात्रा पूरी कर रही है। 2024-25 में त्रिवेणी एक्सप्रेस के लिए तो एलएचबी रैक मिल गई, लेकिन बाघ एक्सप्रेस के लिए अब भी एलएचबी रैक का इंतजार है।
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ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली से बढ़ेगी रफ्तार
दिल्ली-बरेली-लखनऊ रेलखंड को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली से लैस किया जाएगा। इससे सुरक्षा, संरक्षा सुनिश्चित होने के साथ ही ट्रेनों की औसत गति में भी सुधार होगा। गाजियाबाद-मुरादाबाद के बीच जल्द काम शुरू हो जाएगा।
लखनऊ-दिल्ली की दूरी 492 और लखनऊ से बरेली की दूरी 240 किमी है। वर्ष 2024-25 में इस ट्रैक पर मरम्मत, पटरियां, स्लीपर और गर्डर बदलने के काफी काम पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद ट्रेनों की रफ्तार सौ के पार नहीं पहुंच सकी। अभी सिग्नलों के बीच दूरी ज्यादा है। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम के तहत हर डेढ़ किलोमीटर पर सिग्नल लगाए जाएंगे। इससे एक ट्रेन के गुजरने के बाद पीछे आ रही दूसरी ट्रेन को सिग्नल मिलने में देरी नहीं होगी। इससे ट्रेनों की गति 10-15 फीसदी तक बढ़ जाएगी।
महरौली-डासना रेलखंड पर काम पूरा
दिल्ली-लखनऊ रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली के लिए वर्ष 2023-24 में स्वीकृति मिली थी। महरौली-डासना के बीच ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली का काम इसी वर्ष पूरा हुआ है। अब एक समय में एक से अधिक ट्रेनों को पास किया जा सकता है। इससे यहां ट्रेनों की रफ्तार में सुधार हुआ है। संवाद
सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली से सुरक्षा, संरक्षा और समयबद्धता सुनिश्चित होगी। मुरादाबाद मंडल में काम शुरू हो गया है। इससे ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और यात्रा का समय घटेगा।