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UP News: वंदे भारत को विस्तार, बरेली-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के फेरों में इजाफे का इंतजार

Thu, 03 Apr 2025 09:49 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

मेरठ-लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस को वाराणसी तक चलाए जाने की मंजूरी चार माह पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन अब तक ट्रेन का विस्तार नहीं किया गया। वहीं बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस को फेरों में इजाफा होने का इंतजार है।
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वंदे भारत एक्सप्रेस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिर्फ ट्रेनों की चाल ही नहीं, रेलवे में अन्य कामकाज की गति भी धीमी है। 22490/89 मेरठ-लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस को चार माह बाद भी अयोध्या होते हुए वाराणसी तक विस्तार का इंतजार है। घाटे में चल रही इस ट्रेन को दिसंबर 2024 में वाराणसी तक विस्तार की मंजूरी मिल चुकी है। दूसरी ओर 13314/13 बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस को फेरों में इजाफा होने का इंतजार है।

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बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस का संचालन 29 साल पहले अप-डाउन सप्ताह में एक-एक दिन के लिए शुरू किया गया था। अब तक यह ट्रेन उसी ढर्रे पर चल रही है, जबकि यात्रियों की संख्या में पांच गुना से ज्यादा इजाफा हो चुका है। यही कारण है कि लोगों को लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। अप-डाउन सप्ताह में दो-दिन संचालन की मांग लोकसभा में भी उठ चुकी है। रेलवे अधिकारी दो-दो दिन संचालन प्रस्तावित होने की बात तो कहते हैं, लेकिन स्थिति स्पष्ट करने से कतराते हैं।

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दूसरी ओर वंदेभारत एक्सप्रेस से अयोध्या में रामलला और वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा रखने वाले लोगों को भी अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मंजूरी के बाद भी अधिकारी मेरठ-लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस के अयोध्या होते हुए वाराणसी तक संचालन की तिथि पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।

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बरेली से ही बुक हो रहे औसतन 600 टिकट
बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनल में बरेली से ही हर सप्ताह औसतन 600 से ज्यादा सीटें बुक हो जाती हैं। कन्फार्म टिकट न मिलने के कारण लोगों को इस ट्रेन में दो-दो महीने पहले टिकट बुक कराना पड़ता है। दोनों ओर से यह ट्रेन ठसाठस रहती है। लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस के लिए क्षेत्रीय सांसद रेलमंत्री से भी मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। 

यह ट्रेन एक ओर से 1,605 और अप-डाउन में 3,210 किमी दूरी पुराने आईसीएफ कोचों की रैक से ही पूरी कर रही है। इस ट्रेन को अब तक एलएचबी रैक भी नहीं मिल सकी है। इस ट्रेन का ठहराव 24 स्टेशनों पर होता है। इनमें बरेली और लोकमान्य तिलक टर्मिनल के अलावा अलीगढ़, आगरा, मुरैना, ग्वालिय, झांसी, भोपाल, रानी कमलापति, इटारसी, बुरहानपुर, भुसावल, जलगांव, मडमांड, कल्याण, थाणे प्रमुख स्टेशन हैं।

बाघ एक्सप्रेस में प्रस्तावित हैं एलएचबी कोच
13020-19 काठगोदाम-हावड़ा बाघ एक्सप्रेस में एक साल से एलएचबी कोच प्रस्तावित हैं, लेकिन एलएचबी रैक न मिलने के कारण यह ट्रेन भी पुराने आईसीएफ कोच की रैक के साथ अप-डाउन 3,028 किमी की यात्रा पूरी कर रही है। 2024-25 में त्रिवेणी एक्सप्रेस के लिए तो एलएचबी रैक मिल गई, लेकिन बाघ एक्सप्रेस के लिए अब भी एलएचबी रैक का इंतजार है।

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ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली से बढ़ेगी रफ्तार
दिल्ली-बरेली-लखनऊ रेलखंड को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली से लैस किया जाएगा। इससे सुरक्षा, संरक्षा सुनिश्चित होने के साथ ही ट्रेनों की औसत गति में भी सुधार होगा। गाजियाबाद-मुरादाबाद के बीच जल्द काम शुरू हो जाएगा। 
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लखनऊ-दिल्ली की दूरी 492 और लखनऊ से बरेली की दूरी 240 किमी है। वर्ष 2024-25 में इस ट्रैक पर मरम्मत, पटरियां, स्लीपर और गर्डर बदलने के काफी काम पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद ट्रेनों की रफ्तार सौ के पार नहीं पहुंच सकी। अभी सिग्नलों के बीच दूरी ज्यादा है।  ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम के तहत हर डेढ़ किलोमीटर पर सिग्नल लगाए जाएंगे। इससे एक ट्रेन के गुजरने के बाद पीछे आ रही दूसरी ट्रेन को सिग्नल मिलने में देरी नहीं होगी। इससे ट्रेनों की गति 10-15 फीसदी तक बढ़ जाएगी।

महरौली-डासना रेलखंड पर काम पूरा
दिल्ली-लखनऊ रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली के लिए वर्ष 2023-24 में स्वीकृति मिली थी। महरौली-डासना के बीच ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली का काम इसी वर्ष पूरा हुआ है। अब एक समय में एक से अधिक ट्रेनों को पास किया जा सकता है। इससे यहां ट्रेनों की रफ्तार में सुधार हुआ है। संवाद

सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली से सुरक्षा, संरक्षा और समयबद्धता सुनिश्चित होगी। मुरादाबाद मंडल में काम शुरू हो गया है। इससे ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और यात्रा का समय घटेगा।  
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