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वेलेंटाइन वीक स्पेशल: छोटी से मुलाकात से आए करीब, फिर एक दूजे के हुए प्रतीक्षा और नवनीत, लेकिन परिवार था नाराज

Wed, 09 Feb 2022 11:15 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

वेलेंटाइन वीक स्पेशल में इनरव्हील क्लब की सेक्रेटरी प्रतीक्षा शर्मा और फाइनेंस अकाउंट के प्रवक्ता नवनीत सक्सेना की प्रेम कहानी के बारे में जानिए, कैसे दोनों एक दोस्त के घर छोटी से मुलाकात के बाद करीब आए और फिर एक-दूजे के हो गए।
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प्रतीक्षा और नवनीत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्यार करने वालों के लिए सबसे खास होता है वेलेंटाइन वीक। इन सात दिनों में कई युवा विवाह के पवित्र बंधन में बंध जाते हैं तो कई अपने प्यार का इजहार कर प्यार की मंजिल की ओर कदम बढ़ाते हैं। ऐसी ही एक प्रेम कहानी है इनरव्हील क्लब की सेक्रेटरी प्रतीक्षा शर्मा और फाइनेंस अकाउंट के प्रवक्ता नवनीत सक्सेना की। दोनों एक दोस्त के घर छोटी से मुलाकात के बाद करीब आए और फिर एक-दूजे के हो गए।
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प्रतीक्षा की इस प्रेम कहानी में यूं तो कई उतार चढ़ाव भी आए, पर अंततः उनके प्यार को मंजिल मिल ही गई। बकौल प्रतीक्षा, वह 2008 में महाराजा अग्रसेन डिग्री कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हीं दिनों एक दोस्त ने अपने घर पार्टी रखी। वहीं उनकी पहली मुलाकात फाइनेंस अकाउंट के प्रवक्ता नवीनत सक्सेना से हुई। इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच दोस्ती हो गई।

उसी दौरान प्रतीक्षा की मां सुषमा शर्मा की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई। तब नवनीत ने प्रतीक्षा का पूरी शिद्दत से साथ दिया। इसी दौरान दोनों का प्यार परवान चढ़ा, लेकिन प्रतीक्षा इसका इजहार नहीं कर सकीं। नवंबर 2019 में नवनीत ने ही प्यार का इजहार किया। कहा, वह इसी तरह जिंदगी भर उनका साथ दे सकते हैं।
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प्रतीक्षा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती परिवार को इस संबंध के लिए राजी करने की थी। चूंकि प्रतीक्षा ब्राह्मण परिवार से हैं सो उनके माता-पिता कायस्थ परिवार में उनके विवाह को लेकर सहमत नहीं थे। हालांकि नवनीत ने अपने परिवार को मना लिया था। इसमें प्रतीक्षा की उनके भाई उत्कर्ष ने उन्हें मदद की।
 
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उन्होंने परिवार को समझाया। इसके बाद वेलेंटाइन माह में 19 फरवरी, 2010 को प्रतीक्षा और नवनीत विवाह के बंधन में बंध गए। प्रतीक्षा बताती हैं कि उनकी शादी से पिता और मां खुश नहीं थीं। एक साल बाद उन्होंने बेटे दक्ष को जन्म दिया तो इस खुशखबरी को सुनकर मां सुषमा खुद को रोक नहीं सकीं और ससुराल आकर उन्हें गले लगा लिया। शादी के चार-पांच साल बाद पिता ने भा बेटी-दामाद को अपना लिया। आज यह दंपती खुशहाल जिंदगी बिता रहा है।
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