बरेली। कोरोना संक्रमण से बच्चों को सुरक्षित करने के लिए स्कूलों की ओर से पहली डोज तो लगवा दी गई पर दूसरी डोज लगवाने में अड़चनें आ रही हैं। अभिभावक बच्चों को वैक्सीन लगवाने के लिए केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं। यह स्थिति तब है जब देय तिथि पर कॉल और मेेसेज के जरिये सूचना भेजी जा रही है। प्रकरण पर अभिभावक संघ और स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि वे अभिभावकों को प्रेरित कर रहे हैं, ताकि बच्चे वैक्सीन से न घबराएं और खुशी-खुशी टीका लगवाने आएं।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बरेली में अब तक 12 से 14 साल तक के 123207 बच्चों और 13 से 17 साल तक के 272564 किशोरों को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है, लेकिन दूसरी डोज लगवाने के लिए करीब 28 हजार किशोर और 20 हजार से ज्यादा बच्चे टीकाकरण केंद्रों पर अब तक नहीं पहुंचे हैं। इस संबंध में स्कूल संचालकों का कहना है कि पहली डोज लगने के दौरान कोरोना महामारी की तीसरी लहर हावी थी। 18 साल से कम आयुवर्ग के बच्चों के सर्वाधिक चपेट में आने की आशंका जताई जा रही थी। लिहाजा, अभिभावकों की सहमति पर तेजी से विद्यार्थियों को वैक्सीन लगी।
मगर, तीसरी लहर का असर बेहद कम रहा। जो संक्रमित हुए उनके लक्षण गंभीर नहीं हुए, इसलिए चौथी लहर के भी ‘छूकर’ निकलने की संभावना ज्यादातर अभिभावक जता रहे हैं। वहीं, शासनादेश के तहत बच्चों को वैक्सीन लगवाने से पहले अभिभावकों की सहमति होना जरूरी है। ऐसे में जो अभिभावक वैक्सीन लगवाना चाहते हैं। वह खुद ही केंद्रों पर बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। उन्हें प्रेरित भी कर रहे हैं।
अभिभावकों को ऑनलाइन बैठक में किया प्रेरित
अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना के मुताबिक उन्होंने पिछले दिनों दूसरी डोज लगवाने के लिए बच्चों के केंद्रों तक न पहुंचने की प्रकाशित हो रही खबर का संज्ञान लेकर ऑनलाइन बैठक की। इसमें सभी अभिभावकों को बच्चों को दूसरी डोज निर्धारित तिथि पर लगवाने की अपील की। नतीजा रहा कि दूसरी डोज लगवाने वालों की गति भी बढ़ी। 12 से 14 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों को भी दूसरी डोज लगवाने पर चर्चा की गई थी। इसमें अभिभावकों का कहना था कि वह वैक्सीन जरूर लगवाएंगे पर रुककर। वजह उन्होंने दूसरी डोज लगने के बाद बच्चे के बीमार होने की आशंका जताई।