खाते खुलवाकर ले लेते थे डेबिट कार्ड चेकबुक और सिम
गिरफ्तार साइबर ठग ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। इंस्पेक्टर नीरज सिंह की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह ग्रामीणों को लालच देकर उनके नाम से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे। फिर ग्रामीणों से खाते का डेबिट कार्ड, पासबुक और खाते से लिंक सिम कार्ड ले लेते थे। यह सभी चीजें गिरोह के सदस्य अपने सरगना वीरेंद्र को देते थे।
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वीरेंद्र लखनऊ में बैठकर इन्हें कोरियर से कोलकाता में बैठे साइबर ठगों को देता था। वहीं से साइबर ठग इन खातों जरिये ठगी करते व इनमें रकम ट्रांसफर करवाते थे। रकम आने पर ठग रकम निकाल लेते थे और वीरेंद्र को 20 फीसदी कमीशन देते थे। वीरेंद्र इस कमीशन में से दस फीसदी हिस्सा खाते खुलवाने वाले अपने गुर्गों को देता था। गुर्गे मामूली रकम खाताधारक तक पहुंचाते थे।
...इसलिए किराये के खाते में मंगाते हैं ठगी की रकम
जब ठग किसी को झांसे में लेकर खाते में रुपये ट्रांसफर कराते हैं तो पीड़ित ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस से शिकायत करते हैं। शिकायत के बाद सबसे पहले खाते को ट्रेस किया जाता है। पकड़े जाने के डर से साइबर ठग कमीशन पर या किराये पर खाते लेते हैं। इन खातों का संचालन अपने हाथ में लेकर उनमें ठगी की रकम डलवाते और निकालते हैं। जब पुलिस खातों की जांच करती है तो फंसता वह है जिसका वास्तव में खाता होता है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि सभी सात आरोपी जेल भेज दिए गए हैं। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है। साक्ष्य मिले तो ठग मंडली पर और बड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।