बरेली। जागरूकता की कमी कहें या जिम्मेदारों की अनदेखी, वजह कोई भी हो पर शहर में मरीजों का हेल्थ अकाउंट आभा आईडी बनाने में शहरी केंद्र देहात से 30 फीसदी पीछे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष शहरी केंद्रों ने 35 फीसदी तो देहात ने 60 फीसदी लक्ष्य पूरा किया है।
शहरी केंद्रों के नोडल अधिकारी डॉ. अजमेर सिंह का दावा है कि शहरी क्षेत्र में आभा आईडी बनाने के लिए जरूरी जानकारियां लोग आशा कार्यकर्ताओं को उपलब्ध नहीं करा रहे। कई लोग ऑनलाइन आभा आईडी बनाने की बात कहते हैं पर वे पंजीकरण संबंधी जानकारी साझा नहीं कर रहे।
इसकी वजह से पोर्टल पर आईडी दर्ज न होने से भी लक्ष्य के सापेक्ष आंकड़ों में शहरी केंद्र पीछे हैं। कहा कि पंजीकरण बढ़ाने के लिए आशा कार्यकर्ता को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। डॉ. अजमेर के मुताबिक आभा आईडी मरीज का डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड होता है। जिनकी आईडी बनी होती है, उन्हें अस्पताल में लाइन में नहीं लगना पड़ता। वहीं, इलाज संबंधी जानकारी ऑनलाइन होने से चिकित्सकों को इलाज में आसानी होती है। ब्यूरो