बरेली। कुत्तों और बंदरों के आतंक का मामला सोमवार को नगर निगम के सदन में गूंजा। अफसरों ने आंकड़ेबाजी शुरू की तो पार्षद भड़क गए। जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने कहा कि अफसर झूठ बोल रहे हैं। वह ये बताएं कि बजट कहां खर्च हो रहा है?
पूरा शहर कुत्तों और बंदरों के आतंक से भयभीत है। इस पर महापौर उमेश गौतम ने कहा कि एक एजेंसी के भरोसे न रहें। चारों जोन में अलग-अलग एजेंसियों को काम सौंपें। सात दिनों के अंदर इसके लिए टेंडर निकालें।
नगर निगम सभागार में 11 माह एक दिन बाद सोमवार को 11.30 बजे सदन की बैठक शुरू हुई। नौ घंटे चली बैठक में कर निर्धारण में त्रुटियों, छुट्टा पशुओं के साथ ही कुत्तों-बंदरों के आतंक पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच हंगामा हुआ।
विकास को रफ्तार देने के लिए महापौर ने कहा कि 40 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों और नालियों का निर्माण होगा। टेंडर जल्द ही होंगे और दो महीने में काम धरातल पर दिखेगा। जिन्हें कर पर आपत्ति है, वह 30 अक्तूबर तक स्वकर के फाॅर्म भर सकेंगे।
पार्षदों ने साल में छह बैठकों के नियम का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाया तो महापौर ने कहा कि चुनाव की वजह से देरी हुई। अब हर दो माह में बैठक होगी। प्रश्न काल में पार्षदों ने कर निर्धारण में भेदभाव के आरोप लगाए।
कहा कि जोनल कार्यालयों में करदाताओं की शिकायतें महीनों तक लंबित रहती हैं। पार्षद राजेश अग्रवाल ने कहा कि एक-एक हजार रुपये कर वालों को धक्के खाने पड़ते हैं, जबकि बड़ी इमारत वालों को बिना कहे छूट दे दी जाती है। अय्यूब खां चौराहे पर स्थित एक स्वीट हाउस का नाम लेकर कहा कि उनके भवन के दो हिस्से को निर्माणाधीन दिखाकर कर 13 लाख रुपये से घटाकर छह लाख कर दिया गया। साक्ष्य दिखाते हुए जांच कराने की मांग की। कई पार्षदों ने समर्थन में नारेबाजी की।
महापौर ने स्वीट हाउस के भवन का कर घटाने और एक लाख रुपये से अधिक के करदाताओं के मामलों की जांच के लिए समिति के गठन की घोषणा की। इसमें अपर नगर आयुक्त, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और राजस्व प्रभारी शामिल होंगे। ब्यूरो