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Bareilly News: यूपी स्पाइनल इंजरी सेंटर को ''''थेरेपी'''' की जरूरत

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बरेली। स्पाइनल इंजरी (रीढ़ की हड्डी) की तकलीफ से राहत दिलाने के लिए स्थापित यूपी स्पाइनल इंजरी सेंटर को खुद ''''थेरेपी'''' की जरूरत है। मानव संसाधन के इंतजार में 23 सालों से ऑपरेशन थिएटर का ताला नहीं खुला। जंग लगे उपकरणों से मरीजों के बेहतर इलाज का दावा है।
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अमर उजाला की टीम ने स्पाइनल इंजरी सेंटर में व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो स्थिति चौंकाने वाली रही। सालों पुरानी फिजियोथेरेपी मशीनों से ही इलाज किया जा रहा है। घुटने की मांसपेशियों की मजबूती के लिए प्रयोग होने वाली सालों पुरानी क्वाड्रिसेप्स एक्सरसाइज चेयर पर ही थेरेपी की जा रही है। इसके गद्दे फटकर निकल रहे हैं और जगह-जगह जंग भी लग रही है। वॉल पुली सिस्टम, शोल्डर लेडर भी सालों पुराना है। वहीं, एक्सरसाइज साइकिल की भी गद्दी फट चुकी है। हैंडल, चेन में जंग लगने लगी है। बॉडी वॉर्मर भी रिपेयर होकर मरीजों को गर्माहट दे रहा है।
बीते दिनों बीडीए से मिली 500 एमए डिजिटल एक्सरे मशीन से जांच शुरू हो गई है। बिजली आपूर्ति के लिए 25 केवीए जनरेटर मिला पर इससे बल्ब और पंखे ही चलते हैं। मशीन संचालन के लिए 32 केवीए जनरेटर की जरूरत है। यहां रोजाना 50-60 मरीजों का इलाज हो रहा है।
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दो माह से ठप पड़ा जूता, बेल्ट बनाने का कक्ष
स्पाइनल सेंटर में मरीजों के लिए बनने वाले जूते, बेल्ट का कार्य ठप है। संबंधित कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे शंकरलाल के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह कक्ष बंद पड़ा है। इसके अलावा अस्पताल में मरीजों को ऑपरेशन के बाद भर्ती करने के लिए बने वार्ड के बेड जंग लगने से बेकार हो गए हैं। कबाड़ की तरह एक कक्ष में रख दिए गए हैं। परिसर में सर्जरी होती है, ये मरीजों को भी नहीं पता।

परामर्श के पर्चे, जांच के दाम हो गए दोगुने
सेंटर में मरीजों की जांच और इलाज की सुविधा भले नहीं बढ़ी, लेकिन पर्चे और जांचों के दाम दोगुने हो गए हैं। सालभर पहले जो जांच 150, 200, 250 रुपये में होती थी वह अब तीन, चार, पांच सौ रुपये में है। पर्चा चार सौ रुपये का है। पैथोलॉजी में हीमोग्लोबिन, शुगर, बीपी की ही जांच हो रही है, एमआरआई, सीटी स्कैन अन्य पैथोलॉजी जांच नहीं होने से मरीज निजी केंद्रों के चक्कर लगाने को विवश हैं। डॉ. उदयवीर सिंह के मुताबिक यहां बरेली मंडल समेत दिल्ली, उत्तराखंड, प्रदेश के अन्य जिलों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं।

इसलिए अटका है मामला
उप्र स्पाइनल इंजरी सेंटर बरेली और रीजनल रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर स्पाइनल इंजरी एंड अदर आर्थोपेडिक डिसेबिलिटीज को जिला अस्पताल में शुरू कराया गया। जगह कम पड़ने पर नया भवन बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि ग्राम तुलापुर में मिली और कुछ जमीन एमपी तैय्यल ने दान दी थी। 2003 से सेंटर यहीं संचालित है। वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने 86 लाख रुपये दिए। वर्ष 2004 और 2005 में कोई धनराशि नहीं आई। 2005-06 में रिकरिंग धनराशि 20 लाख रुपये मिली। फिर प्रदेश सरकार को बजट और संचालन की जिम्मेदारी मिली पर कोई सुविधा नहीं मिली।

वर्जन
अस्पताल का कोई स्वतंत्र बजट नहीं है। पर्चे, जांच से अर्जित आय ही सहारा है। डॉक्टर, कर्मियों को वेतन इसी से मिलता है। नई मशीनों के लिए मंडलायुक्त ने बीडीए को कहा है। शासन संज्ञान ले तभी स्थिति बदलेगी। - डॉ. आरसी दीक्षित, निदेशक, यूपी स्पाइनल इंजरी सेंटर
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