बरेली। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध से कच्चे माल और ईंधन आपूर्ति की बाधा से बढ़ती ऊर्जा लागत के उद्योगों पर प्रभाव पर बुधवार को इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन बरेली चैप्टर के पदाधिकारियों ने मंथन किया। उद्योगों के ठप होने से बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई।
रामपुर गार्डन स्थित एक रेस्टोरेंट में बैठक के दौरान उद्यमियों ने कहा कि बढ़ती लागत और कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव है। प्लाईवुड उद्योग में केमिकल (मेथनॉल, फॉर्मेल्डिहाइड) की कीमतों में दो से तीन गुना तक बढ़त और उपलब्धता में कमी, ईंट भट्ठों के लिए कोयले की कीमतों में तेजी के साथ आपूर्ति की अड़चन, बेकरी, नमकीन, गत्ता उद्योगों में एलपीजी गैस की प्रभावित आपूर्ति से कई यूनिट बंद होने की आशंका है।
अन्य यूनिट का महज 60 फीसदी क्षमता पर संचालन, प्लास्टिक, पन्नी की सीमित उपलब्धता से कीमतों में करीब 50 फीसदी बढ़त पर बात हुई।प्लास्टिक उद्योग के लिए कच्चे दानों की कमी से तमाम इकाई प्रभावित होने पर भी चर्चा की गई।
चैप्टर चेयरमैन मयूरी धीरवानी ने लगातार बढ़ती जा रही दिक्कत से निजात के लिए प्रशासन को व्यवस्था सुचारू करने की मांग की। मांगों में जमाखोरी, कालाबाजारी पर अंकुश, ब्याज अनुदान की रियायत, एलपीजी की निर्बाध और प्राथमिक आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित कराना रहा।
होटल, रेस्टोरेंट, स्वास्थ्य सेवाएं भी होने लगी हैं प्रभावित
सचिव रजत मेहरोत्रा ने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से उद्योगों के साथ होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल व अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा है। जल्द प्रभावी प्रयास न हुए तो उद्योग में उत्पादन का संकट रहेगा। बेरोजगारी बढ़ेगी। समाज पर नकारात्मक प्रभाव होगा। यहां कोषाध्यक्ष आशीष गुप्ता समेत नीरज गोयल, राकेश धीरवानी, धनंजय विक्रम सिंह, अशोक मित्तल, सलिल बंसल व अन्य उद्यमी मौजूद रहे।