उमेश पाल हत्याकांड में बरेली जिला जेल में बंद अशरफ की भूमिका सामने आने के बाद एसटीएफ और एजेंसियां तेजी से पड़ताल में जुट गई हैं। इस बीच शहर में जमे अशरफ के गुर्गे मोबाइल बंद कर फरार हो गए हैं। किसी शूटर की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर इनकी गिरफ्तारी की जा सकती है।
बरेली जेल में रहते हुए अशरफ ने रिश्तेदार युवक और परिचित की मदद से दो साल में किस तरह शहर व आसपास नेटवर्क खड़ा किया, एजेंसियां उसका पता लगाने में जुटी हैं। खुफिया अमला भी शहर की उन पॉश कॉलोनियों में जानकारी जुटाने में लगा है, जहां अशरफ के लोग रहकर प्रयागराज व अन्य स्थानों से आने वालों की पैरवी करते थे। विपक्ष की पार्टी से जुड़े एक नेता की इस मामले में भूमिका पता चलने के बाद एसटीएफ और सक्रिय हो गई है।
सादा कपड़ों में टीम जुटा रही जानकारी
इस बीच सादा कपड़ों में टीम के सदस्यों ने फाइक एन्कलेव समेत उन इलाकों में भ्रमण कर जायजा भी लिया जहां आलीशान कोठियों में गुर्गे अब तक मौज काट रहे थे। पता लगा कि प्रयागराज की घटना के बाद से ही यहां आवाजाही सीमित है। कुछेक नौकर रह गए थे, जो तीन दिन पहले यहां से खिसक गए।
प्रयागराज पुलिस के सूत्रों से पता लगा है कि अशरफ की पत्नी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। नई गिरफ्तारियों के बाद आरोपियों की निशानदेही पर बरेली शहर व जेल में धरपकड़ की जा सकती है।
बरेली में तैयार किया था नेटवर्क
अशरफ के जेल में शिफ्ट होने के बाद ही उसका एक रिश्तेदार युवक भी बरेली आ गया था। बताते हैं कि अतीक अहमद के कहने पर एक नेता ने उसे बरेली में रहने के लिए मदद की। फाइक एनक्लेव में एक रिटायर्ड अधिकारी के खाली मकान को उसे किराए पर दिलाने और यहां रिहाइश के संसाधन जुटाने में मदद की। बाद में इसी रिश्तेदार युवक ने अशरफ का बरेली में नेटवर्क खड़ा किया।
प्रयागराज से आने वाले लोगों को अशरफ से मिलाने और उसके इशारे पर धंधा चलाने का काम इसी युवक की जिम्मेदारी थी। नेता के परिवार की युवती से उसके प्रेमप्रसंग की चर्चा भी खूब रही। बाद में इसी परिवार की एक लड़की से उसकी शादी तय की गई। चित्रकूट जेल कांड के बाद युवक की गतिविधियां सीमित हो गई। उमेश पाल हत्याकांड के बाद से वो लापता है।