बरेली। नाबालिग से छेड़खानी और मारपीट के मामले में विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट नरेंद्र प्रकाश की अदालत ने दो युवकों को तीन-तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य गवाही में नाबालिग पीड़िता के आरोपों से मुकर जाने के बावजूद न्यायालय ने अभियुक्तों को दोषी पाते हुए दंडित किया है।
बहेड़ी क्षेत्र के युवक ने 24 अप्रैल 2019 को थाने में तहरीर देकर बताया कि उसकी 13 वर्षीय बहन बकरी चराने खेत पर गई थी। शाम पांच बजे गांव के जुबैर व आमिर ने उसको दबोच लिया और छेड़खानी करने लगे। किसी तरह छूटकर वह घर पहुंची और घटना की जानकारी दी। पीड़िता का भाई जुबैर व आमिर के घर शिकायत करने गया तो उनके परिजनों ने उसे गालियां देकर भगा दिया। किशोरी उस समय कक्षा आठ में पढ़ती थी। इससे पहले भी आरोपी कई बार किशोरी के साथ छेड़खानी कर चुके थे पर बदनामी के डर से परिजनों ने शिकायत नहीं की थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
मुकदमा गवाही पर आया तो पीड़िता व उसके घरवाले घटनाक्रम से मुकर गए। यहां तक कह दिया कि आरोपी का नाम पुलिस ने दर्ज किया, उन्होंने नहीं बताया था। विशेष लोक अभियोजन अधिकारी कुलदीप श्रोतिया ने अदालत को बताया कि पीड़ित पक्ष पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। अदालत ने जुबैर व आमिर को दोषी पाते हुए पॉक्सो एक्ट में तीन-तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई।
रिश्वत लेते पकड़े गए लेखपाल की जमानत अर्जी खारिज
बरेली। जमीन की पैमाइश के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए चंकबंदी लेखपाल नितेश माहेश्वरी की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। पूरनपुर के मोहल्ला कायस्थान निवासी नितेश माहेश्वरी चकबंदी लेखपाल है। वह सुभाषनगर में रहता है। आंवला के प्रदुमन ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत की थी कि जमीन की नपाई के लिए चकबंदी लेखपाल 20 हजार रुपये घूस मांग रहा है। 10 मई को टीम ने चकबंदी लेखपाल को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। नितेश की तरफ से अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई। विशेष लोक अभियोजक मनोज वाजपेई ने इसका विरोध किया। अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। संवाद