पश्चिम बंगाल से नाबालिग लड़कियों की तस्करी करने के मामले में अदालत ने मंगलवार को मीरगंज के गांव चुरई दलपतपुर के कल्लू उर्फ नरेंद्र, सराय खास के रईस, फतेहगंज पश्चिमी नई बस्ती के इकबाल, उसकी पत्नी गुलशन, मीरगंज के शेखूपुरा के जहांगीर और उसकी पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने पश्चिम बंगाल से कुछ लड़कियों को अपहरण करके लाए जाने की सूचना पर छह मई 2013 को मीरगंज पुलिस की मदद से गांव चुरई दलपतपुर में कल्लू उर्फ नरेंद्र के घर पर छापा मारा था। इस दौरान वहां से 10 और 13 साल की दो लड़कियां बरामद हुई जिन्होंने पुलिस को बताया कि वे सगी बहनें हैं।
दो अप्रैल 2013 को अंगूरी उर्फ सुमन नाम की महिला हावड़ा स्टेशन से उन्हें फुसलाकर ले आई थी। दो दिन उन्हें जहांगीर के घर में रखा गया और फिर रईस के जरिये कल्लू उर्फ नरेंद्र को 26 हजार रुपये में बेच दिया गया। दोनों 13 दिन से कल्लू के घर में थीं। एक लड़की ने बताया कि कल्लू ने कई बार उसके साथ जबरदस्ती की।
बच्चियों को बेचने वाली अंगूरी पुलिस के छापे से पहले ही जा चुकी थी। कल्लू के ही घर में पुलिस ने जहांगीर, इकबाल और रईस को भी गिरफ्तार किया। जहांगीर ने बताया कि दोनों लड़कियां दो दिन उसके घर रहीं।
इससे पहले वे चार दिन फतेहगंज पश्चिमी के इकबाल के घर रही थीं। रईस ने दोनों को अंगूरी से कल्लू को खरीदवाने की बात कही। चौथे ने अपना नाम कल्लू उर्फ नरेंद्र बताया। जहांगीर और इकबाल की पत्नी रेशमा और गुलशन को भी गिरफ्तार किया गया।