दो कमरे, तीन शिक्षक, शिक्षा की यह दुकान मुंशीनगर में धड़ल्ले से चल रही है। राइट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल आईटी एवं मैनेजमेंट नाम का यह संस्थान की मान्यता भी एक विश्वविद्यालय से नहीं बल्कि चार पांच विश्वविद्यालय से है जिनकी मान्यता के सर्टिफिकेट भी संदेह के घेरे में हैं। जिसमें एक विश्वविद्यालय विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ इंप्लाइमेंट इंडिया है जो कि यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालय की फेहरिस्त में शामिल है। संस्था के चेयरमैन अवधेश कुमार बिजली विभाग में कर्मचारी रह चुके हैं। वह खुद को डिप्लोमा धारक बताते हैं। फ्री में पैरामेडिकल के कोर्स कराने का झांसा देकर करीब दो सौ छात्रों के प्रवेश भी ले लिए। इनकी सेटिंग ऊपर तक इतनी मजबूत है कि कुछ छात्रों के नाम से स्कालरशिप भी हासिल कर ली। जबकि सरकारी संस्थानों से डिप्लोमा करने वाले छात्रों को स्कालरशिप बमुश्किल मिल पाती है। गुुरुवार को मामला डीएम के पास भी पहुंच गया है।
ऐसे खुली पोल
फ्री में पैरामेडिकल कोर्स कराने का छात्रों को झांसा दिया गया। छात्रों से कह दिया जाता है कि उनको आने की जरूरत नहीं। सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। 160 अल्पसंख्यक छात्रों को पैरामेडिकल कोर्स में प्रवेश दिया। करीब 50 छात्र अन्य जाति के हैं। छात्रों के खाते बंधन बैंक डेलापीर पर खुलवाए गए। इसमें कुछ छात्रों की स्कालरशिप आ गई। छात्रों ने स्कालरशिप में कुछ हिस्सा मांगा। इसके बाद खींचतान शुरू हुई और मामला खुल गया।
इन विश्वविद्यालयों से दिखा रहे मान्यता
विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी दिल्ली, महर्षि दयानंद इयर्ली टीचर्स ट्रेनिंग एंड एजूकेशन, एपीएन इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन समेत पांच संस्थानों से मान्यता दिखाई है। पैरामेडिकल के कोर्स विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी दिल्ली से संबद्धता से चल रहे हैं। खुद को सही साबित करने के लिए संस्था संचालकों ने तमाम सर्टिफिकेट भी अपने पास रख रखे हैं।
डीएम तक पहुंचा मामला
छात्र नेता मुस्तफा हैदर के नेतृत्व में छात्रों ने डीएम से मामले की शिकायत की है। शिकायत में कहा कि संस्थान फर्जी है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जिस यूनिवर्सिटी से मान्यता दिखाई गई वह फर्जी है। यूजीसी की वेबसाइट पर उसकी सूची देखी जा सकती है।
बिना एनओसी नहीं खुल सकता कोई संस्थान
यूजीसी के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी विश्वविद्यालय दूसरे विश्वविद्यालय के परिक्षेत्र में अपना संस्थान नहीं खोल सकता है। जिनको सरकार की तरफ से अधिकार दिया गया है जैसे इग्नू या राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय उनके स्टडी सेंटर खुल सकते हैं। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलसचिव साहब लाल मौर्या का कहना है कि हमारे परिक्षेत्र में यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार दूसरी यूनिवर्सिटी का संस्थान नहीं खुल सकता है। विश्वकर्मा फर्जी यूनिवर्सिटी है तो उसका सवाल ही नहीं उठता।
विश्वकर्मा यूनिवर्सिटी से पैरामेडिकल कोर्स संचालित करते हैं। यह यूनिवर्सिटी यूजीसी द्वारा फर्जी घोषित है या नहीं मुझे जानकारी नहीं है। कुछ दबंग लोग दबाव बनाकर पैसे वसूलना चाहते हैं। छात्रों से शपथ पत्र लेकर ही उनको प्रवेश दिया है। इसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि संस्थान उनकी स्कालरशिप ले सकता है। आरोप बेबुनियाद हैं।
अवधेश कुमार, चेयरमैन राईट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल आईटी एवं मैनेजमेंट