वतन विसंगति दूर करने जैसी श्रमिक हितों की कई मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल कर अपनी ताकत का एहसास कराया। आयकर विभाग कार्यालय में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। सबसे ज्यादा बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ। परिवहन निगम की 10 प्रतिशत बसें सड़कों पर नहीं चल पाईं। इससे निगम को आर्थिक क्षति हुई। बीएसएनएल में कर्मचारी धरने पर बैठे।
स्टेट बैंक और बड़ौदा बैंक को छोड़कर लगभग सभी बैंकों में कर्मचारियों ने काम नहीं किया। इससे जिले में करीब ढाई सौ करोड़ का बैंकिंग कारोबार प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि निजी बैंकों में कामकाज हुआ। आयकर विभाग से भी वादकारों को भी लौटना पड़ा। पीडब्लूडी के कर्मचारियों ने भी काम नहीं किया। वहीं, विकास भवन के कई विभागों में भी हड़ताल का असर दिखाई दिया। समाज कल्याण, पंचायत राज विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार, कृषि, डीआरडीए आदि विभागों के कई कर्मचारी धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। सरकारी बीमा क्षेत्र में भी कामकाज अस्तव्यस्त रहा।
शिफ्टि में की नर्सों ने हड़ताल
बरेली। जिला अस्पताल में जिस तरह नर्स शिफ्ट में ड्यूटी करती हैं, उसी तरह उनकी हड़ताल भी शिफ्टि में रही। इससे नर्सों को समस्या तो नहीं हुई लेकिन वार्डों में मरीज बेहाल हो गए। अभी हाल में ज्वाइन करने वाली नर्सें ग्लूकोज की बोतल लगाने को दौड़ती रहीं। मरीजाें के पास समय पर न पहुंचने पर तीमारदारों से नोंकझोंक भी हो गई। इमरजेंसी समेत अन्य वार्डों में दो से तीन संविदा नर्सों ने जिम्मेदारी संभाली। करीब 40 नर्सें संविदा पर हैं, जबकि 50 से अधिक स्थायी नर्स जिला अस्पताल में तैनात हैं। हड़ताल में सुबह की ड्यूटी पर आने वाली नर्सें बैठी। इसके बाद दोपहर बाद दूसरी शिफ्ट की नर्सें हड़ताल में शामिल हुई। इस मौके पर नीरा लाल, सुनैना स्मार्ट, सोनिया मसीह, एलक्जीना, अनीता लाल, नीरजा सक्सेना, अरुणलता शर्मा, मरियम लाल, बबिता मैक्सन, डेजी व अन्य शामिल रहीं।
अल्ट्रासाउंड रहे बंद
शहर के 158 अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर शुक्रवार को ताला लगा रहा। इंडियन रेडियोलॉजिकल इमेजिन एसोसिएशन की ओर से पीसी पीएनडीटी एक्ट में बदलाव की मांग को लेकर यह हड़ताल की जा रही है। एसोसिएशन के सदस्याें ने बताया कि अल्ट्रासाउंड सेंटराें पर लिंग जांच और अन्य छोटी- छोटी गलतियों की सजा एक्ट में एक ही है। जबकि इसमें बदलाव होना चाहिए।
श्रमिक संगठनों ने दिखाई ताकत
-कई विभागों में धरना दिया, जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। शुक्रवार को श्रमिक संगठनों ने अपनी ताकत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। केंद्रीय कर्मचारी समन्वय समिति के केंद्रीय आह्वान पर न्यूनतम वेतन और सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों समेत विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी और श्रमिक संगठनों ने शहर में अलग-अलग धरना-प्रदर्शन के आयोजन किए। इसके बाद सभी कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां ज्ञापन दिया गया।
आयकर भवन पर सुबह से ही धरने की गतिविधियां शुरू हो गईं। जोनल सचिव रविंद्र सिंह ने श्रमिक विरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा। राजेश कुमार, नेहा रस्तोगी, बीडी प्रजापति, एसएस बिष्ट, साक्षी अग्रवाल, एमएमके अब्बास, संजय कौशल आदि ने विचार रखे। इंटक और बरेली ट्रेड यूनियन ने लोनिवि चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर में सभा कर प्रदर्शन किया। इसके बाद कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। कार्यक्रम संयोजक सतीश मेहता, दिनेश सक्सेना, पीएल शर्मा, गीता शांत, हरीश पटेल, मलिक सिंह, संजीव मेहरोत्रा आदि ने विचार रखे। बीएसएनएल इंपलाइज यूनियन और अन्य संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया। अशरफ अली, सोबरन सिंह, गिरीश चंद्र आदि विचार रखे। वहीं, पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने इज्जतनगर कारखाना से डीआरएम कार्यालय तक जुलूस निकाला। इसमें सतीश बघेल, अमित जौहरी, एसके श्रीवास्तव, सुबोध सिंह, पंकज भट्ट, अनवरुल हसन आदि शामिल रहे।
बस संचालन पर विवाद
शुक्रवार भोर में रोडवेज वर्कशाप से बसें संचालित करने के नाम पर विवाद हो गया। क्योंकि इंपलाइज यूनियन सदस्य हड़ताल करने के पक्ष थे। अन्य संगठन तटस्थ रहे। इसलिए सुबह बस वर्कशाप से कम निकली। अफसरों ने बताया कि करीब दस प्र्रतिशत बस संचालन आंदोलन से प्रभावित रहा।
बिखरे -बिखरे दिखे संगठन
देशव्यापी आंदोलन में कर्मचारी संगठन बिखरे बिखरे दिखे। इंटक, सीटू, एटक, एचएमएस आदि ने अलग से सभा और प्रदर्शन कर जुलूस निकाला। आयकर अधिकारी, कर्मचारी संगठन कुछ ही दूरी पर धरना देते रहे। बीएसएनएल कर्मचारी संगठन कैंट स्थित जीएम कार्यालय परिसर में ही धरना दिया। रोडवेज यूनियन भी चारदीवारी में बनी रही। कुछ नेताओं ने बताया कि आंदोलन में ताकत दिखाने के नाम पर अन्य लोग भी शामिल हो जाते हैं, इसलिए चारदीवारी में ही आंदोलन सफल बनाया।