संगठित अपराध के तहत हो रही कार्रवाई
पुलिस ने अब तक गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। माना जा रहा है कि गिरफ्तार होने वाले ठगों की संख्या बढ़ सकती है। ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह पर लगाम लगाने के लिए पुलिस का रवैया सख्त है। एसएसपी अनुराग आर्य ने पहले गिरफ्तार हुए चार आरोपियों पर संगठित अपराध करने की धारा 111 अलग से लगवा दी थी। पुलिस गिरोह के सदस्यों का पंजीकरण कर सकती है। इसके बाद इनकी संपत्ति चिह्नित कर जब्त की जा सकती है।
दीपू ने किराये पर दिया था शुभम का खाता
गिरोह के सदस्य कमीशन पर लोगों का खाता लेकर उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर कराते हैं, उसमें से रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। साइबर थाना प्रभारी ने बताया कि लखनऊ के एक खाते में ठगी की सर्वाधिक रकम 1.10 करोड़ गई थी। उस खाते से एक खाते में तीन लाख रुपये भेजे गए थे। जांच में वह खाता मिर्जापुर की एक जंबो बैग फैक्टरी में काम करने वाले शुभम का मिला।
शुभम की गिरफ्तारी के बाद पता लगा कि उसके दोस्त दीपू ने शुभम के नाम से खाता खुलवाकर उसका डेबिट कार्ड, चेकबुक राजस्थान के एक व्यक्ति को दे दिया था। तीन लाख की रकम उसी व्यक्ति ने उसी दिन निकालकर क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भिजवा दी। उसने कमीशन के तौर पर दीपू को 13 हजार रुपये भेजे थे, दीपू ने इनमें से दस हजार रोककर तीन हजार खाते के मालिक शुभम को दे दिए।