बरेली में हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक ने दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और संदेह का लाभ में दो आरोपियों को बरी कर दिया। थाना भमोरा के गांव गहर्रा निवासी भगवानदास ने 14 मई 2009 को भमोरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 13 मई 2009 को गांव निवासी जयपाल के शादी समारोह में भाई इतवारी खाना खाने गया था। वहां उसकी गांव के जवाहरलाल से कहासुनी हो गई थी।
उसी रात भगवानदास अपने पिता रामदुलार को बैठक पर छोड़ने जा रहे थे। वह जैसे ही बाबूराम के घर के सामने पहुंचे तभी बाबूराम व उसका भाई भगवानदास असलहा लेकर आए। साथ ही ओमकार और हरपाल लाठी-डंडे लेकर आ गए। बाबूराम और भगवानदास ने फायर कर रामदुलार की हत्या कर दी। पुलिस ने भगवानदास की तरफ से चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
ये भी पढ़ें- Shahjahanpur Murder: पिता ने सो रहे बच्चों का मुंह दबाया, एक-एक कर गड़ासे से काटा; पोस्टमार्टम में खौफनाक खुलासा
बाबूराम और भगवानदास से असलहे बरामद कर आर्म्स एक्ट का मुकदमा भी दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। मुकदमे का विचारण अपर सत्र न्यायाधीश अफशा की अदालत में चल रहा था।
अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह अदालत में पेश किए। अदालत ने बाबूराम और भगवानदास को हत्या और आर्म्स एक्ट का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों भाइयों पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने हरपाल और ओमकार को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया।