बड़ी रकम जीतने पर करते थे बेइमानी
इन गेमिंग साइट पर रुपये लगाने वाले जब छोटी रकम जीतते थे तो उन्हें भुगतान कर दिया जाता था। जैसे ही वे बड़ी रकम लगाते या जीतते थे तो उसे हड़पकर ये लोग वेबसाइट से उनकी आईडी हटा देते थे। अधिकतर लोग गेम में हारते थे। साइबर पुलिस से शिकायत होती थी तो नंबर और खाते बदल देते थे। अलग-अलग लोगों के खाते खुलवाकर उनका संचालन अपने हाथ में रखते और उसमें रकम ट्रांसफर करवाकर निकाल लेते थे। खाताधारक को पांच प्रतिशत हिस्सा देते थे। शिकायत होने पर पुलिस खाताधारक को ट्रेस करती थी, जबकि ये तीनों रकम आपस में बांटकर भाग जाते थे।
ठगी की रकम से बनवाई कोठी और दुकान होगी जब्त
साइबर थाना प्रभारी दिनेश शर्मा ने बताया कि ठगी की रकम से गैंग का सरगना शिवम आशुतोष सिटी में आलीशान कोठी बनवा रहा है। कुछ समय पहले शिवम ने काली कमाई से एक चश्मे की दुकान भी खोली थी। सूर्यभान उसका रिश्तेदार है। प्रतिबिंब पोर्टल से जो संदिग्ध नंबर मिला था, वह इनके टैबलेट में इस्तेमाल हो रहा था। इसके जरिये ही पुलिस गिरोह तक पहुंची। इनके पास से जो खाते बरामद हुए हैं, उनसे बड़े पैमाने पर ठगी की गई थी।
साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि तीनों ग्रामीण इलाकों के निवासी हैं। तीनों ने साधारण पढ़ाई की है, लेकिन अच्छे पढ़े-लिखे युवाओं को ठग रहे थे। तीनों ने विभिन्न खातों का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश के लोगों को ठगा है।
चार साल से चल रहा था ठगी का धंधा
एसपी क्राइम ने बताया कि चार साल पहले एनसीआरबी पोर्टल पर शिवम के मोबाइल नंबर के आधार पर ठगी की पहली शिकायत दर्ज हुई थी। प्रतिबिंब पोर्टल से जांच के दायरे में आने के बाद जब उनकी टीम ने चेक किया तो पाया कि गिरोह के लोगों पर कई राज्यों में मोबाइल नंबरों के आधार पर अब तक 15 शिकायतें दर्ज की गई थीं। गिरोह के सदस्य खाते और मोबाइल नंबर बदलते रहते थे, इसलिए पकड़े नहीं गए। अब साइबर क्राइम पुलिस ने शिकंजा कसा है। शिवम की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।