बरेली। बरेली-दिल्ली रेलखंड पर स्थित सरनिया पस्तोर रेलवे क्रॉसिंग बेहद व्यस्त है। आवागमन के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने से आसपास के 20 गांवों के 50 हजार लोग पांच साल से परेशानी झेल रहे हैं। मरीज इलाज के लिए समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। स्कूली बच्चों की वैन भी रोज जाम में फंसती हैं। सेतु निगम और रेलवे की खींचतान की वजह से वहां न तो अंडरपास बना, न ही रेल ओवरब्रिज (आरओबी) मंजूर हो सका।
लोगोंं ने अंडरपास की मांग उठाई तो रेलवे ने उसे खारिज कर आरओबी बनाए जाने का सुझाव दिया। इस पर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार ने सेतु निगम से आरओबी का प्रस्ताव बनाने के लिए कहा। सेतु निगम के अभियंताओं ने मौका मुआयना कर कहा कि वहां आरओबी के लिए पर्याप्त स्थान ही नहीं है। आरओबी के लिए वहां बने मकान गिराने पड़ेंगे। सेतु निगम के अभियंताओं ने अंडरपास की संभावना जताई। ऐसे में यह तय ही नहीं हो सका कि वहां अंडरपास बनाया जाए या आरओबी। नतीजा, लोग जाम झेल रहे हैं। नागरिकों ने बताया कि यह क्रॉसिंग 24 में से करीब 12 घंटे बंद रहती है। इसलिए यहां वैकल्पिक इंतजाम होना चाहिए।
इन गांवों के लोगों को होती है परेशानी: पस्तौर, सरनिया, चंद्रपुर जोगियान, चंद्रपुर काजियान, एना, बादशाहनगर, बहजोईया जागीर, जोगीठेर, बल्ला कोठा, ठिरिया ठाकुरान, रूपपुर, राघवपुर, गौतारा सहित बीस गांवों के लोग परेशानी झेल रहे हैं। ब्यूरो