बरेली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाने की घोषणा से बरेली के उद्यमियों की परेशानी बढ़ गई है। कारोबारियाें के पास कीमतें कम करने के मैसेज, मेल पहुंचने लगे हैं। मेंथॉल, राइस मिलर्स, जरी जरदोजी कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी शुल्क लगाने के फैसले से बरेली के बाजार में हलचल है। कम कीमत में उत्पादों के निर्यात से कारोबार पर भारी असर पड़ना तय है। उद्यमियों के मुताबिक, कारोबार और निर्यात को स्थिर रखने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाने होंगे। बरेली से सबसे ज्यादा मेंथॉल का निर्यात होता है। अमेरिकी टैरिफ लागू किए जाने से विदेशों में उत्पाद की बिक्री के लिए कीमत कम करने के मैसेज आने लगे हैं। दरअसल, 25 फीसदी टैरिफ से उत्पाद की कीमत बढ़ना तय है। माल की बिक्री ऊंचे दामों में करने पर मांग में कमी आना तय है।
लिहाजा, इसे स्थिर रखने के लिए निर्यातक कीमत को कम करने का सुझाव दे रहे हैं। इधर, उद्यमियों की विवशता है कि अगर कीमत कम करें तो मुनाफा कम होगा। जिसका सीधा असर उत्पादन, गुणवत्ता और रोजगार पर पड़ेगा। सरकार से टैरिफ का तोड़ निकालने की मांग है। ब्यूरो
भारत के बजाय दूसरे देश के उत्पादों का रुख कर सकते खरीदार
मेंथॉल कारोबारी गौरव मित्तल के मुताबिक, बरेली रीजन से अमेरिका को सालाना करीब एक हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है। अगर टैरिफ लागू हुआ तो उत्पाद की कीमत बढ़ जाएगी। लिहाजा, खरीदार उन देशों की ओर रुख करेंगे, जहां टैरिफ कम होगा। इसका असर न सिर्फ मेंथॉल बल्कि अमेरिका निर्यात हो रहे सभी उत्पादों पर पड़ेगा। बताया कि बृहस्पतिवार को कीमत कम करने के लिए मेल मिला है।
कीमत घटे या मांग, कारोबार पर असर पड़ना तय
जरी कारोबारी शाकिर का कहना है कि बरेली से जरी उत्पाद का सीधे निर्यात नहीं होता, बल्कि दिल्ली, पंजाब, अहमदाबाद, मुंबई के निर्यातक माल लेकर भेजते हैं। वहां के खरीदार कीमत भी बेहतर देते हैं। लेकिन टैरिफ लगा तो उत्पाद का मूल्य बढ़ने से खरीदारी प्रभावित होने का अनुमान है। उत्पाद निर्यात के लिए मुनाफा को घटाना पड़ सकता है। अगर उत्पाद की मांग कम हुई तो बुनकर प्रभावित होंगे।
बासमती चावल की मांग पर पड़ेगा असर
बहेड़ी राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नईम अहमद का कहना है कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों के माध्यम से बरेली रीजन से चावल का निर्यात अमेरिका किया जाता है। टैरिफ के कारण अगर मांग घटी तो उत्पादन पर पड़ने के साथ ही किसान भी प्रभावित होंगे। बताया कि बरेली से सालाना करीब 500 करोड़ का चावल निर्यात होता है। टैरिफ से सरकारी राजस्व भी प्रभावित हो सकता है।
सोने-चांदी की कीमतें होंगी प्रभावित
बरेली सराफा एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल के मुताबिक, ट्रंप टैरिफ का असर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी की कीमतों पर भी होगा। भारत में आभूषण का निर्माण बड़े पैमाने पर होता है, जिसकी मांग विश्वभर में है। वैश्विक बाजार में हलचल से सोने में निवेश से मांग बढ़ेगी। चांदी की कीमत प्रभावित होगी। कारोबारी संजीव औतार अग्रवाल ने कीमतें पांच से दस फीसदी प्रभावित होने की बात कही है।