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भाजपा का तुरुप तो मोदी जी ही होंगे

Sat, 07 Jan 2017 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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trump card of bjp will be modi factor - फोटो : trump card of bjp will be modi factor
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 विधानसभा के चुनावी महासमर में भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत दलों ने अपने योद्धाओं को चुनाव लड़ाने का तानाबाना बुन लिया है। केंद्र में सत्तारूढ़ और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का सपना देख रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बरेली की नौ विधानसभा सीटों पर अपने नौ योद्धाओं को जिताकर विधानसभा में भेजने की रणनीति बनाने में व्यस्त है। इसकी प्रमुख जिम्मेदारी भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर को सौंपी गई है। क्या है भाजपा ी विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति? क्या रहेंगे मुद्दे? चुनावी मैनेजमेंट से लेकर नोट बंदी, कैशलेश सिस्टम,  पार्टी के एजेंडा और चुनावी मुद्दों पर भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर से सुधाकर शुकला की बातचीत के प्रमुख अंश-  
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बूथ मैनेजमेंट - पार्टी ने प्रत्येक बूथ पर अध्यक्ष के अलावा 21 कार्यकर्ताओं की कमेटी बनाई है। 10 युवा कार्यकर्ता अलग से शामिल किए हैं। इनको सोशल मीडिया और इंटरनेट में प्रशिक्षण देकर दक्ष किया गया है। बूथ कार्यकर्ता बूथों तक न केवल भाजपा के वोटरों को पहुंचाने में मदद करेंगे बल्कि सपा और बसपा की गुंडई भी रोकेंगे। चुनाव में पैसा बांटने, शराब बांटने से लेकर हर तरह के अनैतिक कामों की सूचना चुनाव आयोग और पुलिस को भी देने का काम करेंगे। नेतृत्व तक विपक्षी दलों की गतिविधियों की पल-पल की रिपोर्ट भेजेंगे। धनबल और बाहुबल नहीं चलने देंगे। 
घोषणा पत्र और प्रचार - स्थानीय स्तर पर भाजपा का कोई घोषणा पत्र नहीं होगा। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जो घोषणा पत्र जारी करेगा। उसी पर सब अमल करेंगे। संबंधित क्षेत्र के सांसद स्थानीय स्तर पर जनता को विकास का भरोसा दिलाकर पार्टी का विश्वास जीतेंगे। पार्टी का एक ही नारा होगा जो मोदी जी का है-सबका साथ, सबका विकास। प्रचार सामग्री में भी मुख्य चेहरा मोदी जी और उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य होंगे। जनता में प्रभाव रखने वाले सांसद या बड़े नेता भी प्रचार सामग्री में शामिल किए जा सकते हैं। 
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प्रत्याशियों का खर्च - चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों की खर्च सीमा 28 लाख तय कर रखी है। भाजपा अपने प्रत्याशियों को थोड़ा बहुत पैसा देती है, बाकी पार्टियां टिकट देने के बदले पैसा लेती हैं। प्रत्याशी 15 लाख में ही चुनाव निपटाएंगे क्योंकि वह भोजन भी कार्यकर्ताओं के घर करते हैं। डीजल भी कार्यकर्ता अपनी जेब से लगाते हैं। केवल कमजोर कार्यकर्ताओं को ही डीजल खर्च दिया जाता है। हमारे बड़े नेता होटल के बजाय कार्यकर्ता के घरों में रुकेंगे। खर्च अपने आप कम हो जाएगा। 
तुरुप का इक्का - भाजपा के तुरुप का इक्का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे। पार्टी उनके चेहरे पर ही जनता के बीच जाएगी। जनता को मोदी जी और कमल का फूल याद है। पार्टी अपना प्रत्याशी किसे बनाती है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मोदी जी के मुख्य मुद्दे नोट बंदी, भ्रष्टाचार का खात्मा और गरीबों के कल्याण की योजनाएं लेकर पार्टी जनता के बीच जाएगी। कैशलेश सिस्टम पर जोर रहेगा ताकि भ्रष्टाचार दूर किया जा सके। हर प्रत्याशी और भाजपा कार्यकर्ता अपने इलाके में तुरुप का इक्का है। सीएम का चेहरा चुने गए विधायक तय करेंगे। 
गोपनीय रणनीति भी है - बसपा अपने भ्रष्टाचार और सपा गुंडई व पारिवारिक कलह की वजह से जनता का विश्वास खो चुकी है। सपा में वर्चस्व की लड़ाई जारी है। कांग्रेस का बोरिया बिस्तर पहले ही बंधा रखा है। रही सही कसर मोदी जी ने पुराने पांच सौ और हजार के नोट बंद करके पूरी कर दी। अब ये पार्टियां चुनाव में नंबर दो का पैसा इस्तेमाल नही कर पाएंगी। गरीबों के कल्याण पर भाजपा का फोकस रहेगा। जनता इसे पसंद कर रही है। चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने गोपनीय रणनीति भी बनाई है। जिसको समय आने पर इस्तेमाल किया जाएगा। 
बगावत नहीं होगी - टिकट कटने के बाद भी भाजपा के अन्य दावेदार बागी नहीं होंगे क्योंकि सरकार बनने के बाद पार्टी ने उनको एडजेस्ट करने की प्लानिंग भी तैयार की है। पार्टी अपने विधानसभा प्रत्याशियों की घोषणा 16 जनवरी के आस-पास घोषित करेगी। प्रत्याशी तय करने का पैमाना अमीर गरीब नहीं, समर्पण और इमानदारी होगा। 
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