बरेली। कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने त्रिशूल एयरबेस के रिंग रोड के लिए सर्वे का काम निर्धारित समय 10 फरवरी तक पूरा न करने पर बीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त से नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के बावजूद भी सर्वे में देरी गंभीर बात है। दोनों अफसरों से कमिश्नर ने सोमवार तक सर्वे रिपोर्ट तलब की है। कहा है कि त्रिशूल को रिंग रोड देनी ही होगी। इसमें किसी भी तरह की कोताही को गंभीरता से लिया जाएगा।
पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद हाईअलर्ट घोषित त्रिशूल एयरबेस ने सौ मीटर के दायरे में बने निर्माणों को गलत बताया और प्रशासन से निर्धारित सीमा में रिंग रोड बनाने का अनुरोध किया। एयरफोर्स पहले भी इन निर्माणों को अवैध बताता रहा और कई बार इसपर बैठक भी हुई लेकिन कोई हल नहीं निकल सका था। अमर उजाला ने यह मुद्दा उठाया तो खलबली मची। त्रिशूल ने भी अपनी पुरानी मांग को फिर से उठाया और रिंग रोड की के लिए मांग करने लगा। त्रिशूल की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी अवैध निर्माणों को हटाने पर मंथन शुरू हुआ और सभी विभागों के साथ एयरफोर्स की मीटिंग भी हुई। कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में तय किया गया था कि दस फरवरी तक सर्वे कर लिया जाएगा ताकि अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया जा सके लेकिन पहले से ही लापरवाही बरत रहे विभागों ने पूरी मंशा से काम नहीं किया और दस तक सर्वे पूरा नहीं हो सका। कमिश्नर ने शुक्रवार को इस मामले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। बीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कमिश्नर ने हर हाल में सोमवार को सर्वे रिपोर्ट मांगी है। कहा है कि इसके बाद त्रिशूल के अफसरों के साथ मीटिंग करके रिंग रोड की प्लानिंग की जाएगी। उन्होंने दोनों अफसरों से साफ कह दिया है कि सैन्य सुरक्षा के इस मामले में लापरवाही से काम नहीं चलेगा। अगर सोमवार तक सर्वे रिपोर्ट नहीं मिली तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कितने अवैध निर्माण अबतक यही चयन नहीं
करीब माहभर से सर्वे का काम चल रहा है लेकिन अबतक यह पता नहीं चल पाया कि कितने मकान या संपत्ति इस दायरे में हैं। अलग अलग विभागों के पास अलग रिपोर्ट है। जहां अवैध निर्माण थे वहीं बैठक अफसरों ने सर्वे किए हैं। तमाम बार उंगली भी उठी लेकिन बड़े अफसर इस सर्वे को एक भी दिन देखने तक नहीं गए।