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खीरी को दो तोहफे, बरेली मंडल को कुछ नहीं

Sat, 13 Feb 2016 01:38 AM IST
बरेली
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बरेली। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पांचवें बजट में बरेली मंडल को निराशा हाथ लगी, मगर इससे सटे लखीमपुर खीरी जिले पर मेहरबानी दिखी। दुधवा नेशनल पार्क के महत्व को समझते हुए उन्होंने टाइगर रिजर्व में विकास के लिए दस करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं बाघ व अन्य जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए एक और बड़ी योजना के लिए धन की व्यवस्था कर दी। नेपाल सीमा पर जिन सात जिलों में 257 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के लिए कुल 477 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है, उसमें खीरी का एक बड़ा हिस्सा आएगा।
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इस सड़क के जरिए शिकारियों पर लगाम लगाने में मदद तो मिलेगी ही, एसएसबी भी पेट्रोलिंग करके भारतीय सीमा को सुरक्षित करने का काम बखूबी कर सकेगी। यह सड़क पीलीभीत से बहराइच के मध्य होगी। वहीं अखिलेश सरकार ने खीरी के कृषि महाविद्यालय में आधारभूत सुविधाओं के लिए भी दस करोड़ रुपये दिए हैं।
दूसरी तरफ इस बजट में बरेली मंडल की उपेक्षा हुई है। सरकार के 3.46 लाख करोड़ के बजट में लखनऊ, कानपुर, सीतापुर, हमीरपुर, बुंदेलखंड समेत हर क्षेत्र के लिए कुछ न कुछ दिया गया है, वहीं बरेली मंडल के हाथ कुछ नहीं आया। हां, पूरे सूबे के लिए जिन पुल और सड़कों के लिए 14721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है, उसमें जरूर कुछ हासिल हो सकता है।
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कारोबारी और उद्यमी भी बजट से निराश
बरेली। यूपी बजट को व्यापार मंडल ने इसे धोखा और भ्रामक  बताया है। हालांकि चुनावी  बजट में कोई नया कर नहीं है जो उद्यमियों के लिए राहत की बात है। आबकारी और वैट से दस प्रतिशत राजस्व प्राप्ति लक्ष्य बढ़ाने से महंगाई बढ़ना तय माना तय माना जा रहा है।
भूमि विकास बैंक के माध्यम से किसानाें को सस्ता लोन देने की घोषणा हुई है, इस बैंक पर सपा नेताओं का कब्जा है। भारी भरकम राजस्व देने वाले कारोबारियों को सस्ता लोन देने का कोई प्राविधान नहीं है। बीमार इकाईयां चलाने और औद्योगिकीकरण पर भी रुचि नहीं दिखायी है। वैट लक्ष्य बढ़ाने से उपभोक्ता ही प्रभावित होगा। शाम दवा भी महंगी हो जाएगी।

उद्यमी निराश
बीमार इकाइयों के लिए कोई नया पैकेज नहीं मिलने से उद्यमी निराश हैं। बजट में सरकार औद्योगीकरण के प्रति संवेदनशील नहीं दिखी है। बजट सियासी चश्मा पहन कर बनाया गया है।
- राजेश गुप्ता, चैंबर आफ कामर्स

नया कर नहीं लगने से राहत
बजट में उद्योगों के लिए कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नया कर भी नहीं लगा है। इससे उद्यमियों ने राहत महसूस की है। लेकिन नए करदाता बढ़ाना चाहिए।
- घनश्याम खंडेलवाल, प्रदेश सचिव, आईआईए
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भ्रामक बजट
यूपी बजट पूरी तरह सियासी और भ्रामक है। चालाकी से एक कैबिनेट मंत्री के विभागों को मजबूत करने को भारी भरकम बजट दिया गया है। कारोबारी राजस्व देते हैं, जबकि सुरक्षा और प्रगति के नाम पर कुछ नहीं है।
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- राजेंद्र गुप्ता, प्रांतीय महामंत्री, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
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बजट में व्यापारियाें के लिए कोई घोषणा नहीं है। आनलाइन ट्रेडिंग प्रदेश में बंद कराने की मांग थी। व्यापारी समस्याओं पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है।
- शोभित सक्सेना, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल, कंछल गुट
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