निजी अस्पतालों की लापरवाही का खामियाजा भुगतेंगे मरीज
नए पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की लापरवाही के चलते इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना से इलाज करा रहे मरीजों को दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। नोडल के अनुसार अस्पतालों को डॉक्टर, स्टाफ, बेड, उपकरण, एनओसी, इलाज आदि का ब्योरा अपलोड करना पड़ेगा। जब तक रिकॉर्ड अपलोड नहीं होगा, अस्पताल निलंबित रहेंगे।
आयुष्मान जिला समन्वयक डॉ. अनुराग अग्रवाल के मुताबिक आयुष्मान योजना के पात्र परिवारों की संख्या करीब 4.5 लाख है। इसमें से अब तक चार लाख से ज्यादा 91 फीसदी योजना से जुड़ चुके हैं। आयुष्मान मरीजों के इलाज में बरेली प्रदेश में पहले पायदान पर है। इलाज के सापेक्ष भुगतान में भी बरेली अव्वल है।